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Bhor Ghat section - ये ना ही है जन्नत, ना ही इधर है कोई पर्वत, यह जगह है हर एक Railfan का जो सबकी पूरी करे मन्नत - Sahil Khandare

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MZR/Murtizapur Junction (4 PFs)
मूर्तिजापूर जंक्शन     मुर्तिजापुर जंक्शन

Track: Double Electric-Line

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Jn. Pt. - BD/AK/ELP/YTL, Tangachuk Rd, Murtajapur
State: Maharashtra

Elevation: 303 m above sea level
Zone: CR/Central   Division: Bhusaval

No Recent News for MZR/Murtizapur Junction
Nearby Stations in the News
Type of Station: Junction
Number of Platforms: 4
Number of Halting Trains: 45
Number of Originating Trains: 0
Number of Terminating Trains: 0
Rating: 3.1/5 (9 votes)
cleanliness - excellent (2)
porters/escalators - good (1)
food - poor (1)
transportation - average (1)
lodging - average (1)
railfanning - poor (1)
sightseeing - average (1)
safety - good (1)
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Station News

Page#    Showing 1 to 5 of 5 News Items  
Dec 07 2020 (09:17) अमरावतीशकुंतला रेल नवीनीकरण की बजाए की गयी बंद -मुर्तिजापुर-यवतमाल-अचलपुर (www.enavabharat.com)
IR Affairs
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News Entry# 427453  Blog Entry# 4804836   
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Dec 07 2020 (09:17)
Station Tag: Achalpur/ELP added by Irtaqua Akhter/425313

Dec 07 2020 (09:17)
Station Tag: Yavatmal/YTL added by Irtaqua Akhter/425313

Dec 07 2020 (09:17)
Station Tag: Murtizapur Junction/MZR added by Irtaqua Akhter/425313
मुर्तिजापुर. शकुंतला रेलगाड़ी की एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है और इसका नवीनीकरण करने की बजाय, इसके अस्तित्व पर हमला किया जा रहा है. एक ओर मुर्तिजापुर-यवतमाल-अचलपुर रेल मार्ग का ब्रॉड गेज में परिवर्तन करने के लिए लगनेवाले खर्च का 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने के संदर्भ में रेल मंत्रालय ने पत्राचार किया. इसके बावजूद कोई प्रतिसाद न मिलने से  ‘शकुंतला’ नाम से परिचित इस रेलगाड़ी का नवीनीकरण कब किया जाएगा इस ओर सभी की नजरे लगी हुई है.
उसी तरह इस मार्ग को बंद करने का प्रयास भी पिछले कई वर्षों से शुरू है. शकुंतला रेलवे की फेरिया बंद की गई है. तब से ही इस संदर्भ में अलग विचार की आशंका व्यक्त की जा रही थी. इस संदर्भ में
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जनप्रतिनिधियों द्वारा भी आवाज उठायी नहीं गयी है. इन रेल मार्गों की ओर रेल प्रशासन द्वारा विभिन्न कारण को सामने रखकर इस ओर अनदेखी की है. जिससे इस क्षेत्र का विकास नहीं हो सका है. रेल विभाग द्वारा सन 1914 में अंग्रेजों ने इस रेल को शुरू करवाया था.
विकास की जगह रेलवे विभाग द्वारा मुर्तिजापुर रेलवे स्टेशन पर पानी भरने की सुविधा को बंद कर इसे बडनेरा रेलवे स्टेशन पर ले जाया गया. इसी तरह कई सुविधाओं को धीरे-धीरे स्थानांतरित किया गया. डाक, माल, पार्सल सुविधाओं और लोको शेड आदि सुविधाएं बंद की गयी. लोकसभा की याचिका समिति ने इस रेलवे लाइन के ब्रॉड गेज परिवर्तन की सिफारिश की थी. रेलवे प्रशासन ने जुलाई 2005 और अक्टूबर 2008 में इस मार्ग का प्रारंभिक इंजीनियरिंग-परिवहन सर्वेक्षण (पीइटीएस) किया. समय-समय पर, रेलवे ने वित्तीय प्रावधान और यात्रियों की संख्या की ओर इशारा करते हुए इस मार्ग के रूपांतरण की उपेक्षा की.
रेलवे ने इसे ब्रॉड गेज में परिवर्तित करने के बजाय मार्ग को बंद करना शुरू कर दिया. इस मार्ग के आठ स्टेशन भी बंद कर दिए गए. हालांकि, यात्री दरों में वृद्धि के बावजूद ट्रेन सेवा किसी तरह से शुरू थी. शकुंतला रेलवे लाइन का निर्माण अंग्रेजों ने वर्हाड़ के कपास और विदर्भ से उच्च गुणवत्ता वाले सागौन को सीधे मैनचेस्टर परिवहन के लिए किया था.
उन्होंने भौगोलिक, पर्यावरणीय, पर्यटन और वाणिज्यिक महत्व की जांच के बाद ही इस मार्ग को चुना होगा. इसलिए अंग्रेजों को तब यह एहसास हुआ था कि यह मार्ग कितना उपयोगी है, लेकिन स्थानीय लोगों को इसके महत्व का एहसास नहीं हो रहा है. जिससे यह बात विदर्भ के लोगों का दुर्भाग्यपूर्ण है, की शकुंतला का? इस बात को लेकर लोगों में चर्चाएं शुरू हैं.
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Feb 07 2018 (22:07) भारत के इस हिस्से में आज भी है अग्रेजों का कब्जा, देना पड़ता है करोड़ों का लगान (punjab.punjabkesari.in)
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News Entry# 328893  Blog Entry# 3083758   
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Feb 07 2018 (22:07)
Station Tag: Murtizapur Junction/MZR added by OM SAI RAM ਆਦਿਤਯ ਕੁਮਾਰ~/1462045

Feb 07 2018 (22:07)
Train Tag: Shakuntala NG Passenger/52137 added by OM SAI RAM ਆਦਿਤਯ ਕੁਮਾਰ~/1462045
एक तरफ देश बुलेट ट्रेन के सपने देख रहा है और हमारे देश का रेल बजट लाखों-करोड़ों का है। वहीं दूसरी तरफ रेल की बात करें तो इसी देश में शकुंतला एक्सप्रैस जैसी ट्रेन भी चल रही है। शकुंतला एक्सप्रैस ऐसी रेल लाइन पर चलती है, जिसका मालिकाना हक भारतीय रेलवे के पास नहीं है। ब्रिटेन की एक निजी कंपनी इसका संचालन करती है। नैरो गेज (छोटी लाइन) के इस ट्रैक का इस्तेमाल करने वाली इंडियन रेलवे हर साल 1 करोड़ 20 लाख रुपए की रायल्टी ब्रिटेन की इस कंपनी को देती है।
इस रेल ट्रैक पर आज भी शकुंतला एक्सप्रैस के नाम से सिर्फ एक पैसेंजर ट्रेन चलती है। अमरावती से मुर्तजापुर के 189 किलोमीटर के इस सफर को यह
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6 से 7 घंटे में पूरा करती है। अपने इस सफर में शकुंतला एक्सप्रैस अचलपुर, यवतमान समेत 17 छोटे-बड़े स्टेशनों पर रूकती है। 100 साल पुरानी 5 डिबबों की इस ट्रेन को 70 साल तक स्टीम का इंजन खींचता था। इसे 1921 में ब्रिटेन के मैनचेस्टर में बनाया गया था। 15 अप्रैल 1994 को शकुंतला एक्सप्रैस के स्टीम इंजन को डीजल इंजन से रिप्लेस कर दिया गया। इस रेल रूट पर लगे सिगनल आज भी ब्रिटिशकालीन हैैं। इनका निर्माण इंगलैंड के लिवरपूल में 1895 में हुआ था। 7 कोच वाली इस पैसेंजर ट्रेन में प्रतिनिद एक हजार से ज्यादा लोग ट्रेवल करते हैं।
दरअसल अमरावती का इलाका अपने कपास के लिए पूरे देश में फेमस था। कपास की मुंबई पोर्ट तक पहुंचाने के लिए अंग्रेजों ने इसका निर्माम करवाया था। 1903 में ब्रिटिश कंपनी क्लिक निक्सन की ओर से शुरु किया गया। रेल ट्रैक को बिछाने का काम 1916 में जाकर पूरा हुआ। 1857 में स्थापित इस कंपनी को आज सैंट्रल प्रोविन्स रेलवे कंपनी के नाम से जाना जाता है। ब्रिटिशकाल में प्राइवेट फर्म ही रेल नैटवर्क को फैलाने का काम करती थी। 1951 में भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। सिर्फ यही रूट भारत सरकार के अधीन नहीं था। इस रेल रूट के बदले भारत सरकार हर साल कंपनी को 1 करोड़ 20 लाख की रायल्टी देती है।
खस्ताहाल है ट्रैक
क्योंकि यह आज भी इंडियन रेलवे के अधीन नहीं है तो किसी भी बजट में इस रेल लाइन या इस पर चलने वाली ट्रेन के बारे में सोचा नहीं जाता है और न ही आज तक किसी सरकार ने इसे इंडियन रेलवे के अंतगर्त करने की योजना तैयार की है। यहीं कारण है कि हर साल पैसा देने के बावजूद यह ट्रैक बेहद जर्जर हो चुका है। पिछले तकरीबन 60 साल से इसकी मुरम्मत भी नहीं हुई है। इस पर चलने वाले जे.डी.एम. सीरिज के डीजल लोको इंजन की अधिकतम गति 20 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाती है। इस सैंट्रल रेलवे के 150 कर्मचारी इस घाटे के मार्ग को संचालित करने में आज भी लगे हैं।
दो बार बंद भी हुई रेल
इस ट्रैक पर चलने वाली शकुंतला एक्सप्रैस पहली बार 2014 में मोदी सरकार आते ही और दूसरी बार अप्रैल 2016 में बंद किया गया था। मगर स्थानीय लोगों की मांग और सांसद आनंद राव के दबाव में सरकार को फिर से इसे शुरु करना पड़ा। सांसद आनंद राव का कहना था कि यह ट्रेन अमरावती के लोगों की लाइफ लाइन है। अगर यह बंद हुई तो गरीब लोगों को बहुत दिक्कत होगी। आनंद राव ने इस नैरो गेज को ब्राड गेज में कन्वर्ट करने का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड को भेजा है। भारत सरकार ने इस ट्रैक को कई बार खरीदने का प्रयास किया, मगर तकनीकी कारणों से वह संभव नहीं हो सका।

Jan 12 2017 (11:30) ‘शकुंतला’ करणार आज विश्राम! (www.lokmat.com)
Commentary/Human Interest
CR/Central

News Entry# 291060   
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Jan 12 2017 (11:30)
Station Tag: Murtizapur Junction/MZR added by ameyambre/16020

Jan 12 2017 (11:30)
Station Tag: Yavatmal/YTL added by ameyambre/16020

Jan 12 2017 (11:30)
Train Tag: Yavatmal - Murtajapur (NG) Passenger/52132 added by ameyambre/16020

Jan 12 2017 (11:30)
Train Tag: Murtajapur - Yavatmal NG Passenger/52131 added by ameyambre/16020
अकोला, दि. ११- कधीकाळी वर्‍हाडवासीयांची लाइफलाइन समजली जाणारी शकुंतला रेल्वे गाडी थकली असून, शंभर वर्षांंपेक्षाही अधिक काळ लोटल्यामुळे जागोजागी ढासळत चाललेला रेल्वे मार्ग आणि वारंवार उद्भवणार्‍या इतर तांत्रिक अडचणींमुळे मूर्तिजापूर-यवतमाळदरम्यान धावणार्‍या लेकुरवाळय़ा 'शकुंतलेला' गुरुवारी एक दिवसाची विश्रांती देण्यात आली आहे.
डीझल इंजिनच्या साहाय्याने धावत असलेल्या 'शकुंतले'ला मूर्तिजापूर ते यवतमाळ हे ११२ कि.मी. अंतर कापण्यासाठी सात तास लागतात. किनखेड, विळेगाव, भडशिवणी, पोही, कारंजा लाड, सोमठाणा, सांगवी, वरूडखेड, दारव्हा, तपोना, लाडखेड, लासिनासह आसपाच्या इतर वर्‍हाडवासीयांना अंगाखांद्यांवर घेऊन धावणार्‍या शकुंतलेचा ११२ वर्षांंहून अधिक काळ उलटला आहे. या कालखंडात एकदाही न बदललेल्या नॅरोगेज रेल्वे मार्गाची अवस्था अत्यंत दयनीय झाली असून, वातावरणातील बदलांमुळे तो जागोजागी जीर्ण झाला आहे. लोहमार्गाच्या दुरुस्तीचे कारण स्पष्ट करीत, गुरुवारी एक दिवसाकरिता ५२१३१/५२१३२ मूर्तिजापूर-यवतमाळ-मूर्तिजापूर ह्यशकुंतलाह्ण पॅसेंजर रद्द करण्यात आली असल्याची माहिती मध्य रेल्वेच्या
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भुसावळ येथील जनसंपर्क अधिकार्‍यांनी ह्यलोकमतह्णला दिली.
Dec 07 2016 (23:34) The Little Known Story of Shakuntala Railways, India’s Only Privately Owned Railway Line (www.thebetterindia.com)
IR Affairs
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News Entry# 287939  Blog Entry# 2083740   
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Dec 07 2016 (11:34PM)
Station Tag: Achalpur/ELP added by ⭐ ⭐ ⭐ Telangana Express Oops AP Express ⭐ ⭐ ⭐~/1366147

Dec 07 2016 (11:34PM)
Station Tag: Murtizapur Junction/MZR added by ⭐ ⭐ ⭐ Telangana Express Oops AP Express ⭐ ⭐ ⭐~/1366147

Dec 07 2016 (11:34PM)
Train Tag: Shakuntala Passenger NG/52138 added by ⭐ ⭐ ⭐ Telangana Express Oops AP Express ⭐ ⭐ ⭐~/1366147

Dec 07 2016 (11:34PM)
Train Tag: Shakuntala Passenger NG/52137 added by ⭐ ⭐ ⭐ Telangana Express Oops AP Express ⭐ ⭐ ⭐~/1366147
Most Indians know of only one Shakuntala, the one Kalidasa made famous in his Sanskrit play ‘Abhijnana Shakuntalam‘. They have not heard of Shakuntala Railways, the only railway in India that is still not owned by the Indian government. The reason as to why this railway line does not come under the Indian Railways is still unclear, but when the entire railways was nationalised in 1952, this line was strangely left alone.

The Shakuntala Express
At
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a time when Indian Railways is making plans to introduce high speed bullet trains in the country, Shakuntala Express, one of the last vestiges of the colonial era railways, continues to enthrall train lovers around the world. The antique train runs on India’s only private railway line between Murtazapur and Yavatmal in Maharashtra, chugging along the 190 km stretch at an average speed of 20 km per hour.
Here is the fascinating story of the iconic Shakuntala Railways, the last piece of colonial railway legacy in India.
Shakuntala Express
The Shakuntala Express, a romantic name by all accounts, is a train not many in the country are aware of. But, in Yavatmal and Achalpur (Amravati district) in Maharashtra, it is the lifeline for poor villagers.
It was an era of private railroad companies in 1910 when Shakuntala Railways was founded by a British firm called Killick-Nixon. The private firm floated the Central Province Railway Company (CPRC), a joint venture with the colonial British government in India, for laying railway tracks to be used for transporting cotton from Vidarbha, and finally to Manchester in England. The track had trains running on it by 1916 and soon it was being used to ferry passengers too.
The trains on this track were run by Great Indian Peninsular Railway (GIPR) which operated in Central India. This practice continued even after the GIPR became a part of Indian Railways post independence. Shakuntala Railway is still owned by CPRC, presumably because the government of the day simply forgot to nationalise it, and CRPC is still owned by Killick-Nixon, a British firm. Even though Killick-Nixon has since moved from British to Indian hands, it still leaves us with a privately run train running on Indian tracks!
Old lever from GIPR. Made by McKenzie & Holland, Worcester, England.
A ZD-steam engine, built in 1921 in Manchester, pulled the train for more than 70 long years after being put in service in 1923. It was withdrawn on April 15, 1994, and replaced by a diesel engine that now pulls the carriages. Old-time passengers recall how during the steam engine days, the train used to stop virtually anywhere where passengers hailed it.
Today, the track falls under the Bhusawal division of the Central Railways (of the Indian Railways) but CRPC still owns the Murtazapur – Yavatmal (113 km) and the Murtazapur – Achalpur (76 km) railway tracks. Central Railway which runs the trains on the two sections is supposed to pay royalty to its private partner and CPRC, which owns the lines is contracted to maintain them. This contract has been renewed six times since Independence – every 10 years, railways have a chance to exercise the option of taking over the line.
Interestingly, the trains running on these tracks are the only ones in the country where the guards double up as ticket clerks, as there are no railway staff at most of the stations on the two routes!
Narrow gauge Shakuntala passenger train to Yavatmal at the curve near Murtazapur.
Unlike most railway lines in India that uses broad gauge lines, the Shakuntala Railways still use narrow gauge lines and makes just one return journey every day. At present, the train takes around 20 hours to cover the 190km distance between Yavatmal and Achalpur in Amravati district.
According to the locals, while a bus from Murtazapur to Yavatmal takes just a few hours, it costs ₹ 150, which is six times the train fare. The trains, therefore, have become a lifeline for poor people





Sep 15 2015 (17:25) The little known story about Shakuntala Railway (www.rediff.com)
Commentary/Human Interest

News Entry# 241446   
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Sep 20 2015 (11:16PM)
Station Tag: Murtizapur Junction/MZR added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Sep 20 2015 (11:16PM)
Station Tag: Achalpur/ELP added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Sep 20 2015 (11:16PM)
Station Tag: Yavatmal/YTL added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Sep 20 2015 (11:16PM)
Train Tag: Yavatmal - Murtajapur NG Passenger/52132 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Sep 20 2015 (11:16PM)
Train Tag: Murtajapur - Yavatmal NG Passenger/52131 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Sep 20 2015 (11:16PM)
Train Tag: Shakuntala Passenger NG/52138 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Sep 20 2015 (11:16PM)
Train Tag: Shakuntala Passenger NG/52137 added by Vaibhav Agarwal*^/432532
A historic railway service flounders for an inflexible privatisation policy, notes Bibek Debroy.
I know of only one Shakuntala, the one Kalidasa made famous. I know of nothing that suggests Shakuntala had anything to do with Vidarbha, though Kalidasa (and some of his non-Shakuntala characters) did. You may not have heard of Shakuntala Railway, but it is supposedly named after Shakuntala, princess/queen of Vidarbha.
There is no reason why you should have heard of Central Provinces Railway Company Ltd (CPRC). It was formally incorporated in 1910, has three directors and does everything
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you expect a company to do.
Many people may be unaware that CPRC still runs a railway network in India. This isn't one of those railway networks on private estates, plantations, sugar-mills, collieries, mines, dams, harbours, ports and steel plants. Nor is it a line that a private company temporarily builds and operates, to be eventually handed over to Indian Railways (IR). CPRC is unique.
Once upon a time, CPRC used to have other lines, like Dhond (Daund)-Baramati (opened 1914-15), Pulgaon-Arvi (opened 1917-18), Pachora-Jamner (opened 1919) and Darwha-Pusad (opened 1931).
These became part of IR, continued as narrow gauge and remained neglected lines or were wound up (Darwha-Pusad). The only exception is the strange case of the Ellichpur-Murtazapur-Yeotmal Railway, owned by CPRC and known as Shakuntala Railway.
Murtazapur/Murtizapur is in Maharashtra (Akola district) and is a junction in Bhusawal division of Central Railway (CR), along the main Mumbai-Nagpur-Howrah broad gauge line. However, a narrow gauge line also passes through Murtazapur, divided into a 76-km northern stretch between Murtazapur and Achalpur/Ellichpur and a 113 -km south-eastern stretch between Murtazapur and Yeotmal/Yavatmal.
The Yavatmal stretch was opened in 1903 and Achalpur stretch in 1913. Both segments were constructed and operated by Great Indian Peninsular Railway (GIPR). In 1925, GIPR became part of IR. Therefore, as a legacy, IR started to operate narrow gauge trains along Shakuntala Railway (the train is known as Shakuntala Express).
Locomotives were initially steam, replaced with diesel in 1995. Usually, when one thinks of liberalising railways, one has in mind private train operations (and other forms of private provisioning of goods and services). Track is presumed to be owned by the government.
If you don't do that, there will be accidents and safety issues. There will be management and coordination problems. So runs the refrain. Therefore, the liberalised foreign direct investment and private investment policy don't contemplate private ownership of tracks and related infrastructure. When built by the private sector, it will have to be handed over to IR.
Shakuntala Railway is the opposite. The track is owned by a private company and trains are run by IR (meaning CR). Sure, this is a narrow gauge line, what might be called a branch line. Shakuntala Railway is still owned by CPRC, presumably because the government of the day simply forgot to nationalise it. Since GIPR was only an operator, who owns Shakuntala Railway? Killick Nixon (set up in 1857), the agent for CPRC, does, though Killick Nixon has now moved from British to Indian hands.
There is a contract between CPRC and CR, to be renewed in 2016. Under the contract, CPRC can keep 55 per cent of passenger revenue, giving the rest to CR. Naturally, CPRC is meant to maintain track.
But it doesn't possess the resources and CR has refused to give CPRC the 55 per cent, because CR was forced to spend on renewal and repairs. In fairness, CPRC disowns the contractual liability and this is now stuck in a judicial dispute. By the way, that 55 per cent is worth just over Rs 2 crore. Total annual passenger earnings (there is no freight) are hardly Rs 5 crore 9Rs 50 million).
Through a cotton cultivating tract, Shakuntala Railway once transported cotton to Manchester. But today, CPRC is not interested in it. In 2016, when the contract is renewed, IR can pick up the line for 10 years' revenue, say, Rs 50 crore (Rs 500 million).
Given the state CPRC is in, IR may get it for less. However, IR isn't interested. To rehabilitate 189 km of track, IR will have to spend at least Rs 1,890 crore. Once in a while, demands arise for nationalising the line, with little traction.
As of now, once a day, there is an irregular passenger train that runs on either side of Murtazapur, towards Achalpur and Yavatmal. If the train is irregular, what other choice for passengers? They travel by road, at five times the cost. Ipso facto, someone granted the flexibility of choosing fares should be able to tap the market better and modernise Shakuntala Railway.
It can't be IR and has to be someone other than CPRC. Why not hawk Shakuntala Railway, lock, stock and locomotive, to some other private player? That's sacrilege. Don't you know what happened when Margaret Thatcher privatised ownership of railway infrastructure in Britain? Private ownership of track and related infrastructure is taboo, unless it happens inadvertently, as with Shakuntala.
Those who resist change will argue Shakuntala is an exception, it's a "branch" line. A nuanced opposition is understandable. But why is there this blanket opposition to private ownership of track? Do people in IR not know about their own history and Shakuntala?
The writer is a member of the National Institution for Transforming India Aayog. The views are personal.
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