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Brindavan Express - ರೈಲು ಹೆಸರು ಬೃಂದಾವನ್ ,ಇದು ಯಾವಾಗಲೂ Number 1 - Vijay Baradwaj

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DBEC/Deobaloda Charoda (2 PFs)
     देवबलोदा चरोदा

Track: Triple Electric-Line

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Bhilai Marshalling Yard, Bhilai
State: Chhattisgarh


Zone: SECR/South East Central   Division: Raipur

Type of Station: Regular
Number of Platforms: 2
Number of Halting Trains: 18
Number of Originating Trains: 0
Number of Terminating Trains: 0
Rating: NaN/5 (0 votes)
cleanliness - n/a (0)
porters/escalators - n/a (0)
food - n/a (0)
transportation - n/a (0)
lodging - n/a (0)
railfanning - n/a (0)
sightseeing - n/a (0)
safety - n/a (0)
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Station News

Page#    Showing 1 to 10 of 10 News Items  
कोविड की वजह से इन दिनों जिले के लगभग सभी अस्पतालों में बेड फुल हैं। कहीं बेड नहीं मिल रहा है। वहीं सालभर से बीएमवाई के इंस्टीट्यूट और सांस्कृतिक भवन में सारी व्यवस्था के बाद भी इसे आइसोलेशन सेंटर नहीं बनाया जा सका है। रेलवे प्रशासन ने अप्रैल 2020 से यहां बेड रखा है। सेप्रेट टॉयलेट बनवाए गए हैं। हाथ धोने के लिए पैर से उपयोग होने वाले बेसिन और नल भी लगवाए हैं।
यह सारी व्यवस्था कोरोना के मरीजों को यहां रखने के लिए किया गया था, लेकिन सालभर से यह सब बेकार पड़ा हुआ है। इनका कोई उपयोग नहीं किया जा रहा। वहीं रेलवे अस्पताल में आने वाले मरीजों को या तो रायपुर रेफर किया जा रहा है या फिर
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निजी अस्पतालों में जाने की सलाह दी जा रही है। पिछले साल लॉकडाउन लगने के बाद रेलवे ने अपनी सीमा में इंस्टीट्यूट और सांस्कृतिक भवन को आइसोलेशन सेंटर बनाने का फैसला किया था। इस संबंध में डीआरएम से शिकायत की गई है। इस केंद्र का उपयोग करने से स्थानीय मरीजों को सुविधा मिलेगी।
महिला-पुरुषों के लिए तैयार कराए गए 50 बेडइसके लिए यहां करीब 50 बेड लगाए गए। कुछ बेड रायपुर के रेलवे अस्पताल से मंगाए गए और कुछ बेड एटीओ ऑफिस भिलाई-3 से लाए गए। इन्हें यहां बाकायदा जमाकर और नंबरिंग करके रखा गया है। इसमें महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था है। इसमें वॉश बेसिन लगाए गए हैं। हाथ का उपयोग करने के बजाय एक लीवर लगाया गया है।
रोजाना 10 से 20 संदिग्ध जांच के लिए आ रहे हैंरेलवे अस्पताल में हर दिन इनडोर और आउटडोर पेशेंट के रूप में 50-60 मरीज आ रहे हैं। इनमें 10-20 मरीज कोरोना के संदिग्ध रहते हैं। उनकी प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें स्थान देखकर एक या दो दिन के लिए रखा जा रहा है। इसके बाद मामले को बढ़ते हुए देखकर उन्हें रायपुर रेलवे अस्पताल भेज दिया जाता है। रायपुर में मरीजों का प्रेशर बढ़ने से बेड की भारी कमी है।
ऑक्सीजन बेड के रूप में अब हो सकता है उपयोगइंस्टीट्यूट और सांस्कृतिक भवन में जगह की कमी नहीं है। सुविधाओं का भी अभाव नहीं है। बस यहां ऑक्सीजन की पाइप लाइन की व्यवस्था करने के साथ यहां मरीजों के लिए आइसोलेशन सेंटर बनाया जा सकता है। कोविड के सेकंड स्ट्रेन के दौरान रेलवे के अधिकारियों की ओर से कोई पहल नहीं की गई है। इससे रेलवे के कोविड मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आयुक्त ने किया है तीन बार निरीक्षणभिलाई-चरोदा नगर निगम के आयुक्त कीर्तिमान सिंह राठौर ने इन स्थानों का अभी तक तीन बार निरीक्षण किया है। साथ ही रेलवे के अधिकारियों से भी बातचीत की है। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं हो पाया है। मंडल समन्वयक एसईसीआर मजदूर कांग्रेस के डी. विजय कुमार ने भी मामले की शिकायत पीएचई मंत्री व स्थानीय विधायक गुरु रुद्रकुमार से की है।
50 बोगियों को बनाया गया था आइसोलेशन वार्डबढ़ते कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए रेलवे ने 50 बोगियों को आइसोलेशन वार्ड में बदला है। इसे राज्य शासन की मांग के अनुसार रसमड़ा और दल्ली-राजहरा से भाटापारा तक के विभिन्न स्थानों पर उपलब्ध कराया जा सकेगा। सीनियर डीसीएम डॉ. विपिन वैष्णव ने बताया कि रायपुर मंडल में रसमड़ा से लेकर भाटापारा, मरोदा से लेकर दल्ली-राजहरा, रायपुर से लेकर टीटलागढ़ तक के स्थान आते हैं। इन स्थानों को देखते हुए पिछले साल ही कुछ बोगियों को आइसोलेशन वार्ड का रूप दिया गया था।
स्थान और बेड की कमी नहीं है, मूल समस्या स्टाफस्थान और बेड की कमी नहीं है। मूल समस्या स्टाफ की है। डॉक्टर और नर्स की कमी है। यदि स्थानीय प्रशासन से सहयोग मिल जाए तो इसे आइसोलेशन केंद्र बनाया जा सकता है। इसका उपयोग किया जा सकता है।-डॉ. विपिन वैष्णव, सीनियर डीसीएम रायपुर
Jan 20 (17:27) चरोदा रेलवे यार्ड में मालगाड़ी के दो वैगन पटरी से उतरे, घंटो रास्‍ता जाम (www.naidunia.com)
Major Accidents/Disruptions
SECR/South East Central
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News Entry# 434211  Blog Entry# 4851253   
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Jan 20 2021 (17:27)
Station Tag: Deobaloda Charoda/DBEC added by Adittyaa Sharma/1421836

Jan 20 2021 (17:27)
Station Tag: Raipur Junction/R added by Adittyaa Sharma/1421836
रायपुर। Raipur News : चरोदा रेलवे यार्ड में बुधवार को खाली मालगाड़ी के दो वैगन पटरी से उतर गए। घटना के समय मालगाड़ी की गति कम थी। इसके बावजूद करीब तीन सौ मीटर तक वैगन घिसटता चला गया। पहिए स्लीपर को तोड़ते हुए फंस गए थे। इस घटना के कारण यार्ड के कई विभागों और जी केबिन देवबलोदा जानी वाली सड़क बंद हो गई।
करीब डेढ़ घंटे की मशक्‍कत के बाद वैगन को काटकर अलग किया जा सका। घटना यार्ड में होने से रेल यातायात प्रभावित नहीं हुई। चरोदा रेलवे के यार्ड में क्रू लाबी के समीप ही शंटिंग सेक्शन में यह घटना सुबह 7.30 बजे के करीब हुई। आई केबिन की ओर से मालगाड़ी रिशेप्सन यार्ड देवबलोदा की ओर जा रही
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थी। इस दौरान ही मालगाड़ी के बीच के हिस्से के एक वैगन का पहिया पटरी से उतर गया।
थोड़ी देर बाद इसके पीछे का वैगन भी पटरी से उतर गया। मालगाड़ी की गति इस दौरान धीमी थी, जिसके चलते वैगन पलटने से बच गया। बताया जाता है कि चालक ने मालगाड़ी के वैगन उतरने का आभास होते ही इमरजेंसी ब्रेक लगाया और फिर गार्ड के मध्यम से कंट्रोल रूम को सूचना दी।घटना जिस जगह हुई वहां पर जी केबिन-देवबलोदा जाने का रास्ता है। इसके अलावा रेलवे के कई विभागों में भी इसी रास्ते से कर्मचारी आनाजाना करते हैं। इस दुर्घटना से पूरा रास्ता बंद हो गया।
यहां से आने जाने वाले कर्मचारियों को इंटरनेट मीडिया पर मैसेज भेजकर सिरसा गेट व देवलौदा की ओर से आने के लिए के लिए कहा गया। क्षतिग्रस्त वैगन हटाने व मालगाड़ी को आगे बढ़ाने में करीब दो घंटे से भी ज्यादा का समय लग गया। घटना की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। यह खाली मालगाड़ी फिटनेस जांच के बाद यार्ड में भेजी जा रही थी।
Sep 21 2020 (08:28) रेलवे ने सफाई के लिए किया जागरूक (www.naidunia.com)
IR Affairs
SECR/South East Central
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News Entry# 419108  Blog Entry# 4721445   
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Sep 21 2020 (08:29)
Station Tag: Deobaloda Charoda/DBEC added by Adittyaa Sharma/1421836

Sep 21 2020 (08:28)
Station Tag: Bhilai/BIA added by Adittyaa Sharma/1421836

Sep 21 2020 (08:28)
Station Tag: Dalli Rajhara/DRZ added by Adittyaa Sharma/1421836

Sep 21 2020 (08:28)
Station Tag: Durg Junction/DURG added by Adittyaa Sharma/1421836

Sep 21 2020 (08:28)
Station Tag: Bhatapara/BYT added by Adittyaa Sharma/1421836

Sep 21 2020 (08:28)
Station Tag: Raipur Junction/R added by Adittyaa Sharma/1421836
रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)
स्वच्छता पखवाड़ा के तहत रविवार को रायपुर रेल मंडल के मुख्य परिसरों में विभिन्ना कार्यक्रम आयोजित किए गए । इनके माध्यम से सफाई के लिए जागरूक किया गया। मंडल चिकित्सालय रायपुर, उप- चिकित्सालय बीएमवाई चरोदा, दल्ली राजहरा, भिलाई हेल्थ यूनिट, स्कूलों, रेलवे इंस्टिट्यूट और प्रशिक्षण केंद्रों में पोस्टर-बैनर के माध्यम से स्वच्छता के लिए जागरूक किया गया। रायपुर, भाटापारा, दुर्ग समेत मंडल के विभिन्ना स्टेशनों को सैनिटाइज किया गया। कर्मचारियों से सूखा और गीला कचरा को अलग-अलग डस्टबिन में डालने, कार्यस्थलों, परिसरों में गंदगी न फैलाने की अपील की गई।
बीएमवाई चरोदा से निकलने वाली गुड्स ट्रेनों में अब फुली एसी युक्त व अन्य संसाधनों से लैस इंजन लगाए जााएंगे। यह इंजन 120 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार पर पटरी पर दौड़ेंगी। 12 हजार हॉर्स पावर वाले क्षमता इन इंजनों को चलाने के लिए ड्राइवरों को ट्रेनिंग दिया जा रहा। इस इंजन में लोको पायलट को गर्मी, अधिक धूल या अधिक नमी वाले स्थान पर भी ट्रेन को लेकर जाने में किसी तरह की दिक्कतें नहीं होगी। यह अधिक से अधिक ऊंचाई वाले स्थान पर भी 6 हजार टन आसानी से खींच सकेगा। अधिकतम 120 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से इसे चलाया जा सकेगा। इसे डब्ल्यू एजी -12 नाम दिया गया है। अभी मंडल में 9 इंजन आए हैं। इसे चलाने की ट्रेनिंग लोको पायलटों को दी गई है। ट्रेनिंग प्रक्रिया लगातार जारी है। ऑनलाइन ट्रेनिंग में इसकी थ्योरी बताई जा रही है। वीडियो जारी किया जाएगा। इसका प्रैक्टिकल भी कराया जाएगा।...
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मिले जानकारी इसलिए इंजन में लगाए गए कैमरे
इंजन में एसी लगा है। इसमें नीचे की ओर एक कैमरा भी लगा है। इससे व्हील में किसी भी तरह की फाल्ट आने पर फौरन जानकारी मिल जाएगी। इससे फॉल्ट को दूर करके ट्रेन को चलाई जा सकेगी। यह पूरी तरह मेड इन इंडिया है। इसे भारत के बिहार के मधेपुरा में बनाया गया है। इसमें रिजनरेटिव ब्रेकिंग की सुविधा है।
ऊर्जा और समय दोनों की होगी इस इंजन से बचतअफसरों के मुताबिक डब्ल्यू एजी -12 इलेक्ट्रिकल लोकोमोटिव यूनिट की गति इन दिनों चल रहे इंजन की तुलना में दो गुना है। इन दिनों चल रहा इंजन डब्ल्यूएजी- 9 लोकोमोटिव है। नए इंजन की क्षमता पुराने इंजन से दो गुनी है। इसकी गति भी अधिक है। ट्रेन में फॉल्ट आने पर दूसरी यूनिट से पूरी क्षमता से काम लिया जाएगा।
लांग हॉल की स्थिति में भी 1 हजार यूनिट प्रेशर बनाए
यह इंजन लांग हॉल की स्थिति में भी एक हजार यूनिट का प्रेशर बनाए रखेगा। इससे अधिक वजन को आसानी से खींचा जा सकेगा। इसके लिए इसमें एक हजार लीटर वाले रिजरवायर लगाए गए हैं। इससे यह एक अनुपात 150 की तीव्रता वाली ऊंचाइयों में भी आसानी से 6000 टन वजन खींच लेगा। भविष्य में 800 ऐसे लोकोमोटिव चलाए जाने की संभावना है। भविष्य में और अधिक रनिंग स्टॉफ मेंबर्स को इस लोको का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे काम के निष्पादन में और अधिक निश्चितता आने की उम्मीद है। इस इंजन का उपयोग अगले 15 दिनों में शुरू किए जाने की तैयारी की गई है। इसके तहत ही ट्रेनिंग दी जा रही।
जानिए लाए गए इन नए इंजन की विशेषताएं
बीएमवाई चरोदा में दिया जा रहा है प्रशिक्षण
नए इंजन को मधेपुरा से लाने के बाद बीएमवाई में रखा गया है। यहां पर गुड्स ट्रेनों के लोको पायलटों को इसकी विस्तार से जानकारियां दी जा रही हैं। इसे ऑपरेट करने समेत इसके डिसप्ले बोर्ड समेत कैमरे, एसी कैब का सिचुवेशन आदि के बारे में बताया जा रहा है। कोविड -19 के कम्युनिटी स्प्रेड को देखते हुए पहले इसकी ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी।

3 Public Posts - Sat Aug 01, 2020





पीपी यार्ड चरोदा के इंजीनियरों ने ट्रेनों के पहियों में लगने वाले ब्रेक की जांच के लिए नया टेस्टिंग बैंच बनाया है। इससे प्रति ब्रेक सिलेंडर रेलवे को करीब 6 हजार रुपए की बचत होगी। इस तरह एक गुड्स ट्रेन के रैक में कम से कम 54 बोगियां होती हैं। हर दिन 14 से 15 रैक का मेंटेनेंस किया जाता है। इस तरह हर दिन रेलवे को कम से कम 48.60 लाख की बचत होगी। इस नए अविष्कार को रेलवे बोर्ड ने भी मंजूरी दे दी है। इसके बाद से इस बैंच से मेंटेनेंस का काम भी शुरू कर दिया गया है। लगातार प्रयोग किए जा रहे थे। 
बदल दिया जाता था ब्रेक सिलेंडर, अब होगा सुधारअभी तक सिलेंडर में समस्या आने
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पर उसे बदलकर नया सिलेंडर लगाया जाता था। ब्रेकयान की मेंटेनेंस के दौरान हर दिन औसतन 8 से 10 बोगी का माउंटेन ब्रेक सिलेंडर बदले जाते थे। नए सिलेंडर लगाए जाते थे। इसमें रेलवे को काफी खर्च उठाना पड़ता था। नए उपकरण के बन जाने से अब सिलेंडर का पीपी यार्ड में बने उपकरण से मेंटेनेंस किया जा सकेगा। रेलवे ने बताया कि सिलेंडर को बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें समय की भी काफी बचत होगी। 
यार्ड में उपलब्ध संसाधनों से बनाया उपकरणमंडल के वरिष्ठ मंडल यांत्रिक  इंजीनियर (समन्वय) एसके सेनापति एवं सीनियर डीएमई पीपी यार्ड भिलाई के दिशा निर्देशन में जेई बी जयचंद्रा ने गुड्स ट्रेनों के ब्रेक वैन में लगने वाले ब्रेक सिलेंडर की ओवरहालिंग टेस्टिंग के लिए नया बैंच बनाया है। इसकी सहायता से बोगी माउंटेन ब्रेक सिलेंडर को ब्रेक वेन में लगाया जाता है। अब इसकी ओवर हालिंग एवं टेस्टिंग बैंच पीपी यार्ड में उपलब्ध संसाधनों से की जाएगी। 
एक से डेढ़ घंटे में पूरा होगा मेंटेनेंस का कामपहले सिलेंडर बदलने में काफी समय लगता था। उसमें श्रम भी अधिक लगता था और खर्च अभी अधिक होता था। नए उपकरण का उपयोग करने से बोगी का मेंटेनेंस 60 से 90 मिनट में हो जाएगा। यह रिसर्च डिजाइन स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन मानकों के अनुसार रहेगा। यह सुरक्षा और राजस्व की बचत की दृष्टि से पहले की तुलना में और अधिक बेहतर साबित हो रहा है। इससे रेलवे को गुड्स ट्रेनों के मेंटेनेंस करने में पहले की तुलना में अधिक सहुलियत हो रही है। 
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