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Vivek Express - জেগে ওঠো, সচেতন হও এবং লক্ষ্যে না পৌঁছানো পর্যন্ত থেমো না - Dip

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News Entry# 404662
कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगे लॉक डाउन के दौरान पलामू में गेहूं-चावल का 11 रेलवे रैक आ चुका है। रैक से चावल-गेंहू उतारने वाले मजदूरों को अबतक कोई सुविधा नहीं मिली है। इससे वे नाराज हैं। रेलवे रैक को खाली करने में 150 मजदूर काम कर रहे हैं। परंतु पीने का पानी के साथ खाने और विश्राम करने की जगह और न तो मजदूरों को मास्क आदि दिया गया है। भारतीय रेलवे माल गोदम श्रमिक संघ के को-ऑडिनेटर अखिलेश कुमार ने कहा कि यहां पर तीन ठेकेदार के अंदर 150 मजदूर 14 से 18 घंटे काम कर रहे हैं। प्रति बोरा मजदूरों को तीन रुपए के दर से भुगतान किया जाता है। इन मजदूरों का ना तो ठेकेदार मुलभूत सुविधा दे रहे हैं और न तो रेलवे प्रबंधन कोई उचित कदम उठा रहा है। उन्होंने जब लॉक डाउन लगा था और रेलवे का रैक यहां आया तो...
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था उस समय निम्म क्वालिटी का मास्क दिया गया था, परंतु वह मास्क फट चुका है। उसके बाद से मजदूरों को न तो सेनेटाइजर न तो मास्क दिया गया है। उड़ती धूल के बीच मजदूर काम करने को विवश हैं। उन्होंने कहा कि इस परिसर में पांच चापाकल है,जिसमें तीन चापाकल खराब पड़ा हुआ है। संघ के को-ऑडिनेटर श्री कुमार ने मजदूरों की समस्याओं से संघ के महामंत्री को भी अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि माल गोदाम में 15 किलोमीटर दूरी तय कर चांदो गांव के मजदूरों को आने-जाने कासा धन उपलब्ध नहीं हैं। रात के समय बैगन के अंदर रौशनी की भी कोई सुविधा नहीं हैं। कार्य क्षेत्र में श्रमिकों के लिए किसी प्रकार की बीमा सुरक्षा भी नहीं है। ऐसी स्थिति में सभी मजदूर अपनी जान की बिना परवाह किये बगैर लॉक डाउन में काम करने को विवश हैं। इस कारण मजदूरों के हित में उचित कदम उठाया जाए।
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