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Entry# 4714161-0
Medium; Side View; Large TB; EOG/SLR; Outside of Train; Standing at Station;
Entry# 4715020-0


05003/Chauri Chaura COVID - 19 Special
چوری چورا کووڈ - ۱۹ سپیشل     चौरी चौरा कोविड-१९ विशेष

CPA/Kanpur Anwarganj --> GKP/Gorakhpur Junction

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📢⚟ घने कोहरे एवं खराब मौसम से होने वाली परिचालनिक कठिनाईयों के कारण 05003 कानपुर अनवरगंज-गोरखपुर विशेष गाड़ी 16 दिसम्बर, 2020 से 31 जनवरी, 2021 तक कानपुर अनवरगंज-प्रयागराज रामबाग के मध्य आंशिक रूप से निरस्त रहेगी। ZBTT Changed on 4.12.2020 🔹 To run with LHB rake w.e.f 05.02.2021
Thu Jan 28,
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2021 (11:34PM)
Pantry/Catering
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✕ E-Catering
Updated: Dec 04 2020 (00:00) by 12611_MAS_GARIB^~
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Arr:
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cleanliness - excellent (2)
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food - excellent (2)
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railfanning - excellent (2)
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Feb 04 (08:11) चौरीचौरा शताब्‍दी महोत्‍सव : 29 जुलाई 1990 को पहली बार चली थी चौरीचौरा एक्सप्रेस (www.jagran.com)
Commentary/Human Interest
NER/North Eastern
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News Entry# 436924  Blog Entry# 4866325   
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Feb 04 2021 (08:11)
Station Tag: Chauri Chaura/CC added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Feb 04 2021 (08:11)
Station Tag: Gorakhpur Junction/GKP added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Posted by: Anupam Enosh Sarkar^~ 24433 news posts
गोरखपुर, प्रेम नारायण द्विवेदी। चौरीचौरा घटना की याद में 29 जुलाई 1990 को पहली बार चौरीचौरा एक्सप्रेस चली थी। यह ट्रेन इसी दिन पहली बार बड़ी लाइन पर वाराणसी के रास्ते गोरखपुर से इलाहाबाद जंक्शन तक चली थी। चौरीचौरा के बलिदानियों की याद में तीस साल से अधिक समय से यह ट्रेन आज भी निर्बाध गति से चल रही है। इस ट्रेन का मार्ग विस्तार कानपुर अनवरगंज तक हो गया, लेकिन नंबर 05003-05004 नहीं बदला। ट्रेनों का नंबर पांच अंक का हो जाने के बाद रेलवे प्रशासन आवश्यकतानुसार ट्रेन नंबर के आगे 1 या 0 लगाता रहता है।
बड़ी लाइन पर गोरखपुर से इलाहाबाद तक चलने वाली पहली ट्रेन बनी थी चौरीचौरा
जानकारों
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के अनुसार 29 जुलाई 1990 को वाराणसी में आयोजित समारोह में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और तत्कालीन रेलमंत्री जार्ज फर्नांडीज ने आमान परिवर्तन (छोटी से बड़ी रेल लाइन) का लोकार्पण किया था। उनके कार्यक्रम के लिए प्रकाशित रेलवे के ब्रोसर में मुख्यमंत्री और रेलमंत्री के शुभकामना संदेश और इस ट्रेन को संचालित करने का उल्लेख है। बोसर के मुताबिक बड़ी लाइन पर चौरीचौरा के अलावा गोरखपुर से कृषक और दादर एक्सप्रेस का भी संचालन शुरू हुआ था। रेलवे का ब्रोसर आज भी पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर स्थित धरोहर कक्ष में सुरक्षित है। हालांकि, इस ब्रोसर के अलावा चौरीचौरा एक्सप्रेस को लेकर रेलवे के पास कोई दूसरा साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
तीस साल से अधिक समय से बलिदानियों की याद में चल रही चौरीचौरा एक्सप्रेस
दरअसल, पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य मार्ग बाराबंकी-गोरखपुर-छपरा-बरौनी का आमान परिवर्तन वर्ष 1981 में ही पूरा हो गया था। इस रेलमार्ग पर बड़ी लाइन वाली एक्सप्रेस ट्रेनें चलने लगीं। लेकिन भटनी-वाराणसी रेलमार्ग पर छोटी रेललाइन ही थी।
वाराणसी और इलाहाबाद जाने वाले गोरखपुर के यात्रियों को भटनी में ट्रेन बदलनी पड़ती थी। तब भटनी-वाराणसी तक 161 किमी रूट पर छोटी लाइन की त्रिवेणी एक्सप्रेस चलती थी। हालांकि, 5 अप्रैल 1980 को भटनी-वाराणसी 161 किमी रेल लाइन का आमान परिवर्तन के लिए शिलान्यास हो गया था। 20 मई 1990 को आमान परिवर्तन का कार्य पूरा हो गया। यहां जान लें कि चौरीचौरा की घटना और बलिदानियों की याद में चौरीचौरा जनक्रांति शताब्दी समारोह वर्ष मनाया जा रहा है।
चौरीचौरा शताब्दी वर्ष के अवसर पर चार फरवरी को चौरीचौरा एक्सप्रेस नए कलेवर में दिखेगी। 24 कोच के लिंक हॉफमैन बुश (एलएचबी) वाली रेक लगाकर गोरखपुर से रवाना की जाएगी। इस कोच के लगने से ट्रेन का रंग भी बगल जाएगा। कोच के अंदर का स्वरूप भी बदला नजर आएगा। सीटें आरामदायक होंगी, टॉयलेट भी अत्याधुनिक होंगे। बुधवार को कोच की सफाई और मरम्मत कार्य शुरु हो गया है। यह ट्रेन रात में जब चौरीचौरा स्टेशन पर रुकेगी तो इसका स्वागत भी होगा।चौरीचौरा एक्सप्रेस में होंगे 22 कोचगोरखपुर से कानपुर अनवरगंज तक जाने वाली चौरीचौरा एक्सप्रेस (15003/15004) अभी स्पेशल के रूप में चल रही (05003/05004) ट्रेन में आरक्षित श्रेणी के दो कोच अब बढ़ जाएंगे। 20 की जगह 22 कोच लगाकर चलाई जाएगी। इससे सीटें भी बढ़ेंगी। 
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किमी यात्रा में ट्रेन के 31 स्टॉपेज
चौरीचौरा एक्सप्रेस कुल 552 किमी की यात्रा तय करती है। यह ट्रेन गोरखपुर से कानपुर अनवरगंज के बीच 31 स्टेशनों पर रुकती है। इसकी अधिकतम गति 110 किमी प्रति घंटा है और स्टॉपेज लेकर 40.27 किमी प्रति घंटे की गति से चलती है।
ये हैं एलएचबी कोच की खूबियां
दुर्घटना की दृष्टि से काफी सुरक्षित होती है।काफी संख्या व अच्छी क्वालिटी के स्प्रिंग व शॉकर लगे हैं जिससे जरा सा भी झटका महसूस नहीं होता है। सामान्य कोच की तुलना में वातानुकूलन ज्यादा बढ़िया होता है। कोच के बाहर की बॉडी स्टील तथा अंदर की एल्युमीनियम की बनी होती है। 
आग से भी पूरी तरह से होती है सुरक्षित (फायर प्रूफ कोच)  
सामान्य कोच से दो मीटर लंबे होते हैं ये कोच।  
स्लीपर में 72 की जगह 80 सीटें होती हैं।
प्रयागराज, जेएनएन। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन चौरीचौरा शताब्दी समारोह वर्ष की तैयारी में जुटा है। इसके तहत ट्रेन का कलेवर भी बदला जा रहा है। गोरखपुर से कानपुर अनवरगंज तक चलाई जाने वाली चौरीचौरा स्पेशल ट्रेन प्रयागराज जंक्शन से होकर जाती है। यह ट्रेन अब नए कलेवर में दौड़ेगी। 
चौरीचौरा ट्रेन में चार फरवरी से एलएचबी कोच लगाया जाएगा
दरअसल, चौरीचौरा की एतिहासिक घटना के 100 वर्ष पूरा होने पर प्रदेश सरकार शताब्दी समारोह मनाएगी। रेलवे ने भी इस उपलक्ष्य पर 05003/05004 गोरखपुर-कानपुर अनवरगंज-गोरखपुर चौरीचौरा स्पेशल ट्रेन में यात्रियों का सफर और आरामदायक
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बनाने के लिए कोच में बदलाव करेगा। यह गाड़ी चार फरवरी से गोरखपुर से और पांच फरवरी से कानपुर अनवरगंज से एलएचबी कोच लगाकर चलाई जाएगी। अभी चौरीचौरा ट्रेन कंवेंशनल रैक से चलाई जा रही है। कुल 22 कोच वाली चौरीचौरा कोहरे की वजह से आंशिक रूप से चलाई जा रही थी। सोमवार से यह नियमित रूप से चलाई जाने लगी है।
पूर्वोत्तर रेलवे के पीआरओ बोले-यात्रियों का आरामदायक होगा सफर
पूर्वोत्तर रेलवे के पीआरओ अशोक कुमार ने बताया कि एलएचबी कोच में यात्रियों को झटके महसूस नहीं होंगे। साथ ही यात्रा और आरामदायक बनाने के उद्देश्य से रेलवे ने एलएचबी कोच लगाने का निर्णय लिया है।
लिच्छवी में भी लगाए गए एलएचबी कोच
04006/04005 आनंद विहार-सीतामढ़ी-आनंद विहार के बीच चलने वाली लिच्छवी एक्सप्रेस मेें भी 29 जनवरी से एलएचबी कोच लगाए गए हैं। नए रंगरूप की ट्रेन देखकर यात्री अचरज में पड़ गए। एक बार पूछकर गाड़ी में सवार हुए। इस कोच में यात्रियों को झटके नहीं लगते हैं। हादसे में भी जानमाल का कम से कम नुकसान होता है। दुर्घटना होने पर कोच एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते हैं। कुल मिलाकर नए कलेवर की लिच्छवी एक्सप्रेस अब पहले से आकर्षक और सुरक्षित है।
Jan 31 (22:14) ट्रेन के चपेट में आने से युवक की मौत, परिवार में मचा कोहराम (www.amarujala.com)
Crime/Accidents
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News Entry# 436101  Blog Entry# 4863041   
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Jan 31 2021 (22:14)
Train Tag: Chauri Chaura COVID - 19 Special/05003 added by ANIKET/1490219

Jan 31 2021 (22:14)
Station Tag: Deoria Sadar/DEOS added by ANIKET/1490219
Stations:  Deoria Sadar/DEOS  
Posted by: ELSG~ 1250 news posts
देवरिया जिसे के भटनी वाराणसी रेल खंड पर हरनहीं चौराहा के समीप ट्रेन के चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई। इसकी सूचना आस पास के लोगों ने कोतवाली पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।विज्ञापन जानकारी के मुताबिक, कोतवाली थाना क्षेत्र के बरसीपार छावनी टोला गांव निवासी हरिनरायण प्रसाद का पुत्र प्रवीण कुमार (27) रविवार की सुबह चौरीचौरा एक्सप्रेस के चपेट में आ गया। जिससे उसकी मौत हो गई। आस पास के लोग शौच के लिए गए तो शव देख कोतवाली पुलिस को सूचना दी।  वहीं मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिवार वालों की मानें तो वह मानसिक रूप से बीमार था। जिसका एक प्राइवेट अस्पताल से करीब छह महीने से इलाज चल रहा था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।इस बाबत कोतवाल...
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नवीन कुमार मिश्र ने बताया कि पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। युवक मानसिक रूप से बीमार बताया जा रहा है।
चौरीचौरा कांड के शताब्दी वर्ष में जहां प्रदेश सरकार शताब्दी महोत्सव मनाकर पूरे देश में एक संदेश देने की कोशिश में है वहीं रेलवे प्रशासन भी इसे यादगार बनाने जा रहा है। चौरीचौरा स्टेशन को देश स्तर की सुविधाएं मुहैया कराने के लिए आदर्श स्टेशन के रूप में चुना गया है। इसके साथ ही चौरीचौरा एक्सप्रेस में चार फरवरी को अत्याधुनिक सुविधाओं वाला लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोच लगाकर गोरखपुर से रवाना किया जाएगा। आजादी के बाद से अब तक चौरीचौरा रेलवे स्टेशन उपेक्षा का शिकार रहा है। स्टेशन पर अभी सिर्फ दो प्लेटफॉर्म और एक छोटा वेटिंग हाल है। जबकि इस रूट से वर्तमान समय में 40 से ज्यादा ट्रेनें संचालित हो रही हैं। अब रेलवे प्रशासन ने आदर्श स्टेशन के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके बाद रेलवे स्टेशन की खूबसूरती तो बढ़ेगी ही यात्रियों से संबंधित सुविधाएं बढ़ जाएंगी।
भवनों
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का भी कायाकल्प किया जाएगा। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने कुल 53 स्टेशनों को आदर्श स्टेशन के लिए चुना है, इनमें चौरीचौरा स्टेशन भी है। अब यहां सुविधाओं को लेकर योजनाएं बन रहीं हैं, जिन्हें जल्द ही मूर्तरूप दिया जाएगा।
स्टेशन पर ये सुविधाएं होंगी
लिफ्ट, स्वचालित सीढ़ियां, अत्याधुनिक शौचालय, विश्रामालय, बैठने के लिए ज्यादा बेंच और कुर्सियां, पेयजल, वाहनों के आवागमन की सुविधा आदि। 
चौरीचौरा एक्सप्रेस में होंगे 22 कोच
गोरखपुर से कानपुर अनवरगंज तक जाने वाली चौरीचौरा एक्सप्रेस (15003/15004) अभी स्पेशल के रूप में चल रही (05003/05004) ट्रेन में आरक्षित श्रेणी के दो कोच अब बढ़ जाएंगे। 20 की जगह 22 कोच लगाकर चलाई जाएगी। इससे सीटें भी बढ़ेंगी। 
522 किमी यात्रा में ट्रेन के 31 स्टॉपेज
चौरीचौरा एक्सप्रेस कुल 552 किमी की यात्रा तय करती है। यह ट्रेन गोरखपुर से कानपुर अनवरगंज के बीच 31 स्टेशनों पर रुकती है। इसकी अधिकतम गति 110 किमी प्रति घंटा है और स्टॉपेज लेकर 40.27 किमी प्रति घंटे की गति से चलती है।
ये हैं एलएचबी कोच की खूबियां
दुर्घटना की दृष्टि से काफी सुरक्षित होती है।
काफी संख्या व अच्छी क्वालिटी के स्प्रिंग व शॉकर लगे हैं जिससे जरा सा भी झटका महसूस नहीं होता है।सामान्य कोच की तुलना में वातानुकूलन ज्यादा बढ़िया होता है।
कोच के बाहर की बॉडी स्टील तथा अंदर की एल्युमीनियम की बनी होती है।
आग से भी पूरी तरह से होती है सुरक्षित (फायर प्रूफ कोच)सामान्य कोच से दो मीटर लंबे होते हैं ये कोच।
स्लीपर में 72 की जगह 80 सीटें होती हैं।
सामान्य व एलएचबी कोच की तुलना
विशेषता           सामान्य कोच (स्लीपर)    एलएचबी कोच (स्लीपर)
चलने पर आवाज    100 डेसीबल           60 डेसीबल
कोच की लंबाई      21.5 मीटर             23.54 मीटर
अग्नि सुरक्षा          कुछ नहीं                फायर प्रूफ कोच
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