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16216/Chamundi Express
ಚಾಮುಂಡಿ ಎಕ್ಸ್‌ಪ್ರೆಸ್     चामुंडी एक्सप्रेस

SBC/KSR Bengaluru City Junction (Bangalore) --> MYS/Mysuru Junction (Mysore)

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D3 and D4 are considered as general coaches and as reserved coaches for other trains which has RSA with this train.
Sat May 18, 2019 (03:53PM)
Pantry/Catering
✕ Pantry Car
✓ On-board Catering
✕ E-Catering
Updated: Jul 01 (16:27) by Jayashree ❖ Amita*^
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cleanliness - average (16)
punctuality - good (16)
food - average (15)
ticket avbl - good (15)
u/r coach - average (8)
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safety - good (12)
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के सर्पाकार रेलवे ट्रैक पर ट्रेन 90 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ेगी। 18 कोच वाली ट्रेन में आगे-पीछे दो इंजन लगाए जाएंगे। रेलवे ट्रैक में ब्स्ट लेस कंक्रीट की पटरियां बिछाई जा रही हैं। कश्मीर के बाद यह तकनीक कर्णप्रयाग रेल लाइन बिछाने में प्रयोग की जा रही है। हरिद्वार-देहरादून के बीच चलने वाली ट्रेनों की तरह ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ट्रेन में 18 कोच होंगे। सर्पाकार रेल लाइन पर स्पीड के लिये ट्रेन में आगे-पीछे दो इंजन लगाये जाएंगे। बिना स्लीपर वाली ब्लास्ट लेस कंक्रीट की पटरियों पर ट्रेन 90 किलोमीटर से अधिक स्पीड से दौड़ेंगी। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच 125 किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रेन को दो घंटे का समय लगेगा। वर्तमान में कार से यह दूरी तय करने में दोगना समय लगता है। खास बात यह है कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के बीच पड़ने वाले 11 रेलवे स्टेशन ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, देवप्रयाग, मलेथा, श्रीनगर, धारी, रुद्रप्रयाग,...
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धोलतीर, गौचर, कर्णप्रयाग स्टेशनों में शिवपुरी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकने पर कुछ डिब्बे सुंरग के अंदर ही रहेंगे। 18 कोच वाली ट्रेन होने से इस स्थान पर प्लेटफार्म सुरंग के अंदर भी बनेगा।रेल विकास निगम के प्रबंधक ओपी मालगुडी ने बताया कि कर्णप्रयाग-ऋषिकेश के बीच 18 कोच की ट्रेन दौड़ेगी,जिसमें दो इंजन लगे होंगे। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कर्णप्रयाग रेल लाइन एलाइमेंट कार्य में हाई रिजोल्यूशन सेटेलाइट इमेजरी जैसी आधुनिक तकनीक इस्तेमाल की गई है। इसलिये रेल विकास निगम इसमें कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता है। सबसे पहले सुरंग और पुल निर्माण कार्य ही होने हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के बीच 11 रेलवे स्टेशन और कच्चे पहाड़ में लगभग 17 छोटी-बड़ी सुरंग बनाना विशेषज्ञों के लिये चुनौती है। ट्रैक में 35 ब्रिज भी बनाए जाने हैं। लगभग 16216 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को सरकार ने 2012 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया। उन्होंने बताया कि 2025 तक प्रोजेक्ट पूरा किया जाना है।
  
Jan 30 (11:18) नए रूप में दिखेगा ऋषिकेश रेलवे स्टेशन, नजर आएगी केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति (www.jagran.com)
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Jan 30 2019 (11:20)
Train Tag: Chamundi Express/16216 removed by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948

Jan 30 2019 (11:18)
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Stations:  Rishikesh/RKSH  
Posted by: Renovation And Doubling of PBH Soon*^~ 941 news posts
ऋषिकेश, दुर्गा नौटियाल। भारतीय रेलवे की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के पहले रेल स्टेशन (न्यू ऋषिकेश) में केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति नजर आएगी। खास बात यह कि इस परियोजना के तहत बनने जा रहे अन्य रेलवे स्टेशनों का डिजाइन भी उत्तराखंड के मंदिरों व पारंपरिक भवनों की निर्माण शैली पर आधारित होगा। हालांकि, अभी सिर्फ ऋषिकेश रेलवे स्टेशन के डिजाइन को ही अंतिम रूप दिया है और इसी वर्ष अप्रैल-मई में इस स्टेशन का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
16216.31 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तेजी से आकार लेने लगी है। इस परियोजना में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक 126 किमी लंबी रेल लाइन बिछाई जानी है। रेल लाइन का सिर्फ 21 किमी
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हिस्सा ही जमीन की सतह पर होगा। शेष 105 किमी रेल लाइन भूमिगत यानी टनल्स (सुरंगों) से होकर गुजरेगी। 
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के प्रबंधक ओपी मालगुड़ी के अनुसार तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण इस रेल परियोजना की खास बात यह है कि इसके तहत बनने वाले 16 रेलवे स्टेशन आम रेलवे स्टेशनों से अलग होंगे। प्रत्येक रेलवे स्टेशन पर देवभूमि की झलक और पहाड़ी भवनों की निर्माण शैली देखने को मिलेगी। 

इसी कड़ी में परियोजना के पहले रेलवे स्टेशन (न्यू ऋषिकेश) के मानचित्र को अंतिम रूप दे दिया गया है। न्यू ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति देखने को मिलेगी। यानी स्टेशन भवन का मुख्य प्रवेश द्वार पूरी तरह केदारनाथ मंदिर की तरह नजर आएगा। 

अन्य स्टेशनों के मानचित्र भी उत्तराखंड के प्रसिद्ध मंदिरों और पहाड़ी शैली के भवनों की तरह ही तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक अन्य स्टेशनों के मानचित्रों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। न्यू ऋषिकेश रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य इन दिनों प्रगति पर है। मालगुड़ी ने दावा किया कि इसी वर्ष मार्च-अप्रैल में यह स्टेशन बनकर तैयार हो जाएगा। 

2025 में दौड़ने लगेगी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के बीच रेल 
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना पर 18 सुरंगें बननी हैं, जिनकी लंबाई करीब 205 किमी होगी। यही वजह है कि वन विभाग ने इस परियोजना के लिए 173.0313 हेक्टेयर भूमि धरातल पर और 327.5683 हेक्टेयर भूमि भूमिगत स्थानांतरित की है। 
नौ पैकेज में निर्मित होने वाले 18 टनल के लिए जल्द ही टेंडर आमंत्रित किए जाने हैं। इससे पहले रेल विकास निगम का प्रयास है कि टनल तक पहुंचने के लिए एप्रोच व एडिट रोड तैयार कर दी जाएं। इनके लिए टेंडर प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। कुछ कंपनियों ने एप्रोच व एडिट रोड का काम भी शुरू कर दिया है। 
यही नहीं, टनल निर्माण से पूर्व ही टनल के मुहानों तक पावर सप्लाई देने का काम भी शुरू कर दिया गया है। ताकि टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होते ही कंपनियों को निर्माण में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। रेल विकास निगम का दावा है कि 2024 तक परियोजना का निर्माण पूरा हो जाएगा और 2025 में उत्तराखंड के पहाड़ों पर रेल दौड़ने लगेगी। 

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर एक नजर 

-रेल परियोजना की कुल लागत 16216.31 करोड़ रुपये। 
-ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की कुल लंबाई 126 किमी। 

- रेल लाइन पर कुल 18 सुरंगें और 16 पुल बनेंगे। 
-सबसे बड़ी सुरंग की लंबाई 15.100 किमी, जबकि सबसे छोटी सुरंग .220 किमी लंबी होगी। 

-छह किमी से अधिक लंबी सुरंगों पर एक निकासी टनल भी बनाई जाएगी। 
-प्रत्येक सुरंग की चौड़ाई आठ गुणा 10 डायमीटर होगी। 
-सुरंग के भीतर लाइट व एयर वेंटिलेशन की भी पूरी व्यवस्था होगी। 
-रेल लाइन का मात्र 21 किमी हिस्सा ही बाहर होगा, शेष 105 किमी रेल लाइन सुरंगों से गुजरेगी। 
-ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक कुल 16 रेलवे स्टेशन होंगे।
-रेल परियोजना के तैयार होने के बाद रेल से कर्णप्रयाग पहुंचने में करीब ढाई घंटे का वक्त लगेगा।
  
Nov 21 2018 (06:47) यात्रीगण कृपया ध्यान दें : सुरंग के अंदर है रेलवे स्टेशन (www.jagran.com)
Commentary/Human Interest
NR/Northern
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Nov 21 2018 (06:52)
Train Tag: Chamundi Express/16216 removed by Anupam Enosh Sarkar*^~/401739

Nov 21 2018 (06:47)
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Nov 21 2018 (06:47)
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Nov 21 2018 (06:47)
Station Tag: New Rishikesh/NRKSH added by Anupam Enosh Sarkar*^~/401739
Posted by: Anupam Enosh Sarkar*^~ 11904 news posts
मुरादाबाद (प्रदीप चौरसिया) : पुराने जमाने में भगवान की उपासना करने के लिए लोग पहाड़ों की गुफा में जाते थे। इसी तरह अब उत्तराखंड के तीर्थ यात्रियों को ट्रेन से सुरंग के अंदर यात्री करनी पड़ेगी। 84 फीसद ट्रेन यात्रा सुरंग के भीतर से होगी। एक रेलवे स्टेशन तो सुरंग के बीच ही होगा। स्टेशन के बाहर जाने के लिए लिफ्ट लगाई जाएगी। इस रेल मार्ग के निर्माण में सहयोग करने के लिए डीआरएम मुरादाबाद को नामित किया गया है। पिछली केंद्र सरकार ने बनाई थी योजना पिछली केंद्र सरकार ने कश्मीर में रेल लाइन पहुंचने के बाद देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ों पर लाइन बिछाने की योजना बनाई थी। इसके तहत प्रथम चरण में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक लाइन बनाई जानी है, जिससे तीर्थ यात्री केदारनाथ व बद्रीनाथ आसानी से पहुंच सकें। रेल लाइन के निर्माण से उत्तराखंड का विकास भी होगा। वर्तमान सरकार ने सत्ता संभालते ही ऋषिकेश-कर्ण प्रयाग रेल...
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मार्ग का काम तेजी से शुरू करने के लिए रेलवे विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) बनाया है। आरवीएनएल ने 105 किलोमीटर रेल मार्ग का सर्वे किया है। इसमें 84.24 फीसद किलोमीटर भाग में ऊंचे पहाड़ हैं। जहां सुरंग बनाकर ट्रेन चलाई जाएगी। 15.76 फीसद दो पहाड़ों को जोड़ने वाला स्थान खुला है। ऋषिकेश कर्ण प्रयाग के बीच 12 स्टेशन बनाए जाने हैं। इसमें देव प्रयाग और मलेथा के बीच 15 किलोमीटर की सुरंग बनाई जाएगी। मलेथा स्टेशन सुरंग के अंदर होगी। यार्ड का कुछ हिस्सा सुरंग से बाहर बनाया जाएगा। सुरंग से बाहर आने के लिए लिफ्ट और स्वाचालित सीढ़ी लगाई जाएगी। शेष रेलवे स्टेशन दो पहाड़ को जोड़ने वाले खाली स्थान पर बनाए जाएंगे।
आरवीएनएल ने न्यू ऋषिकेश स्टेशन और कर्ण प्रयाग जाने के लिए रेल मार्ग का निर्माण शुरू कर दिया है। सुरंग के अंदर रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई है। ट्रेन रुकने के बाद स्टेशन पर आगे आने वाली सुरंग की जानकारी दी जाएगी।
तुर्की की कंपनी करेगी गंगोत्री और यमुनोत्री रेल मार्ग का निर्माण
कर्ण प्रयाग से आगे गंगोत्री और यमुनोत्री तक दुर्गम पहाड़ों पर भी रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना है। इसके लिए तुर्की की कंपनी से करार किया गया है। तुर्की की कंपनी ने सर्वे का काम भी तेजी से शुरू कर दिया है।
शुरू हो चुका है निर्माण
ऋषिकेश कर्ण प्रयाग रेल मार्ग का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। गंगोत्री और यमुनोत्री रेल मार्ग का सर्वे तुर्की की कंपनी द्वारा किया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्ण प्रयाग मार्ग पर वर्ष 2025 तक ट्रेन संचालन शुरू किया जाना है। इस मार्ग को सुरंग का रेल मार्ग के नाम से जाना जाएगा।
- अजय कुमार सिंघल, मंडल रेल प्रबंधक, मुरादाबाद
ऋषिकेश कर्ण प्रयाग मार्ग के स्टेशन
न्यू ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, देवप्रयाग, मेलेथा, श्रीनगर, तिलोनी धारी (रुद्रप्रयाग), सिरवाई, गोचर, कर्णप्रयाग।
मार्ग पर पुलों की स्थिति सबसे ऊंचा पुल : 50 मीटर
सबसे लम्बा पुल: 460 मीटर
कुल निर्माण लागत: 16216 करोड़ रुपये
सुरंग : 17
तीन जगह पर राष्ट्रीय राजमार्ग को मोड़ा जाएगा।
  
Apart from working men, women also form a majority of commuters who travel towards the capital city from Mysuru during the morning hours.
MYSURU: Taking note of the increase in number of women commuters on trains, the South Western Railway (SWR), Mysuru division, has introduced exclusive coaches for women on Mysuru-Bengaluru trains. Three trains have been equipped with four coaches for women passengers only.
According to a release from the office of senior divisional commercial manager, SWR, Mysuru, S G Yathish Kumar, “While two coaches will be reserved for women on Chamundi Express (train number
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16215/16216), one each are at Vishamanav Express (17326/17325) and Tipu Express (12613/12614) totalling four coaches.”
Sources told The New Indian Express that following several complaints from commuters during the recent visit by Divisional Railway Manager Aparna Garg for inspection, it was decided to add extra coaches for women. This is in addition to the existing ladies coach located next to the engine.
Apart from working men, women also form a majority of commuters who travel towards the capital city from Mysuru during the morning hours.Most of these women are employed at garment factories in and around Bengaluru. At times, they find it difficult to jostle for space along with men, a commuter said.
Addl coaches to clear Diwali rush
Bengaluru: To clear the extra rush of passengers during Diwali, the following trains will be provided temporarily with one 3-tier Second Class Sleeper coach shortly. The Yesvantpur - Bidar - Yesvantpur Express (Train No. 16571/16572), which runs four days a week, will have the additional coach from November 1 to 15 from the Yesvantpur end and from November 2 to 16 from the Bidar end, said an official release.The Yesvantpur - Latur - Yesvantpur Tri-weekly Express (Train no. 16583/16584) will be augmented with the additional coach from November 2 to 16 from Yesvantpur and from November 3 to 17 from Latur.
  
Oct 02 2018 (14:28) ऋषिकेश - कर्णप्रयाग रेल लाइन 6 साल में (inextlive.jagran.com)
New Facilities/Technology
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Oct 02 2018 (14:28)
Train Tag: Chamundi Express/16216 removed by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948

Oct 02 2018 (14:28)
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Oct 02 2018 (14:28)
Station Tag: New Rishikesh/NRKSH added by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948
Posted by: 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~ 3310 news posts
देहरादून, 125 किमी लंबी, 12 स्टेशन, 17 सुरंगों व 35 ब्रिज के साथ करीब 16216 करोड़ रुपये की लागत की ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन अगले छह साल में यानि 2024 तक शुरू हो जाएगी. वीरभद्र-ऋषिकेश रेल लाइन 2019-20, ऋषिकेश-देवप्रयाग रेल लाइन 2023-24 व देवप्रयाग-कर्णप्रयाग रेल लाइन 2024-25 तक तैयार होगी. परियोजना के तहत रेलवे द्वारा श्रीकोट में एक अस्पताल, एक पुल व स्टेडियम का निर्माण भी किया जाएगा.
चार जिलों के डीएम को निर्देश
सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को सचिवालय में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के कार्यो की प्रगति
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की समीक्षा बैठक ली. उन्होंने डीएम पौड़ी, चमोली, टिहरी व रुद्रप्रयाग को निर्देश दिए हैं कि रेलवे व कमिश्नर गढ़वाल के साथ समन्वय बनाकर प्राथमिकता के आधार पर भूमि व मकान क्षतिपूर्ति के साथ अन्य मामलों का निपटारा करें. सीएम ने रेल लाइन के कार्यो की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि संबंधित डीएम आपसी अनुभव साझा करते हुए कार्यो में आने वाली बाधाओं को जल्द से जल्द समाप्त करें.
भूमि हो चुकी है ट्रांसफर
रेल विकास निगम लिमिटेड ने बताया कि वीरभद्र-ऋषिकेश रेल लाइन निर्माण कार्य, अंडर ब्रिज, ओवर ब्रिज, चन्द्रभागा के ऊपरी भाग में ब्रिज निर्माण, गूलर, कोडियाला, धारीदेवी, शिवपुरी तक अप्रोच रोड व प्रवेश मार्ग का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है. राज्य सरकार द्वारा जियो टेक्नीकल इन्वेस्टिगेशन के लिए अनुमति दे दी गई है. जियो टेक्नीकल इन्वेस्टिगेशन का कार्य परियोजना की कुल 126 किमी के क्षेत्र में चल रहा है.
परियोजना की प्रगति पोर्टल पर
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के तहत ऋषिकेश में नए रेलवे स्टेशन का प्रस्ताव रखा गया है. भारत सरकार द्वारा विशेष रेलवे प्रोजेक्ट के रूप में घोषित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की मॉनिटरिंग राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के रूप में प्रगति पोर्टल के माध्यम से की जा रही है. वर्तमान में रेलवे परियोजना के लिए आवश्यक समस्त वन भूमि व उत्तराखंड सरकार की भूमि हस्तांतरित हो चुकी है.
मुख्य बातें
-चारों जिलों में 167 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण अंतिम चरण में
-2018 में 900 करोड़, 2019-20 में 1050 करोड़ व 2020 में 2200 करोड़ रूपये व्यय होंगे.
ऊर्जा निगम को दिये आदेश
सीएम ने निर्देश दिए हैं कि भूमि अधिग्रहण के लिए अधिकारी व परियोजना निर्माण में बिजली की समुचित आपूर्ति के लिए ऊर्जा निगम तेजी से कार्य करें. सभी स्टेशन उत्तराखंड के पर्यटक स्थलों व पर्वतीय शैली के स्थापत्य को ध्यान में रखकर बनाए जाए. इसके अलावा मुआवजा वितरण में तेजी लाई जाए.
चारधाम में रेल की सिफारिश
आरवीएनएल द्वारा जानकारी दी गई कि उत्तराखंड के चारधाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ को रेलवे सेवा से जोड़ने के लिए लगभग 327.11 किमी लंबी रेल लाइन की सिफारिश की गई है. जिसकी अनुमानित लागत करीब 43292 करोड़ रुपये है. चारधाम के लिए नई रेलवे कनेक्टिविटी को फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए चालू वित्तीय वर्ष में रेलवे बोर्ड द्वारा करीब 120.92 करोड़ रुपये का बजट अनुमोदित किया गया है.
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