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Large Station Board;
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RMR/Ramnagar (2 PFs)
رامنگر     रामनगर

Track: Single Diesel-Line

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National Highway 121, Ramnagar
State: Uttarakhand


Zone: NER/North Eastern   Division: Izzatnagar

No Recent News for RMR/Ramnagar
Nearby Stations in the News
Type of Station: Regular
Number of Platforms: 2
Number of Halting Trains: 0
Number of Originating Trains: 11
Number of Terminating Trains: 11
Rating: 3.4/5 (17 votes)
cleanliness - excellent (2)
porters/escalators - poor (2)
food - good (2)
transportation - average (2)
lodging - average (2)
railfanning - good (2)
sightseeing - excellent (3)
safety - average (2)
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Station News

Page#    Showing 1 to 20 of 79 News Items  next>>
Feb 04 (23:22) रामनगर-गैरसैंण रेल मार्ग का सर्वे बागेश्वर तक करें (www.jagran.com)
Commentary/Human Interest
NER/North Eastern
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News Entry# 437110  Blog Entry# 4867232   
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Feb 04 2021 (23:22)
Station Tag: Ramnagar/RMR added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Ramnagar/RMR  
जागरण संवाददाता, बागेश्वर : जन सुविधा के लिए मंडल के अंतर्गत चलने वाली यात्री ट्रेनों को नियमित रूप से संचालित करने की मांग शुरू हो गई है। साथ ही रामनगर-गैरसैंण प्रस्तावित रेल मार्ग का सर्वे विस्तार गैरसैंण-गरुड़-बागेश्वर तक शामिल करने की मांग की गई है। पूर्व विधायक कपकोट ललित फस्र्वाण ने मंडल रेल प्रबंधक पूर्वोत्तर रेलवे इच्जतनगर को पत्र लिखा है। उन्होंने मंडल रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति की बैठक के लिए सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता के लिए काठगोदाम से दिल्ली एवं दिल्ली से काठगोदाम तक चलने वाली संपर्क क्रांति मार्च 2020 से बंद है, जिसे चलाया जाना जरूरी है। उत्तराखंड की जनता को वैष्णो देवी के दर्शन, फौजी जवानों के लिए जम्मू कश्मीर जाने के लिए एक ट्रेन काठगोदाम से जम्मू और जम्मू से काठगोदाम तक चलने वाली गरीब रथ साप्ताहिक ट्रेन को भी संचालित किया जाए। टनकपुर-नई दिल्ली के बीच एक्सप्रेस ट्रेन नियमित रूप से...
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संचालित की जाए। पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों को पूर्व की भांति सुविधाएं बहाल होनी चाहिए। काठगोदाम से नई दिल्ली और नई दिल्ली से काठगोदाम तक चलने वाली शताब्दी ट्रेन में कैटरिग की सुविधा भी पूर्व की भांति सुचारू की जाए। उत्तराखंड के प्रवेश द्वार हल्द्वानी स्टेशन का सुंदरीरकण करने, काठगोदाम, हल्द्वानी, लालकुआं, रुद्रपुर सिटी स्टेशनों में यात्री सुविधा का विशेष ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अधिकांश जनता पर्वतीय स्थानों में निवास करती है। देहरादून जाने के लिए सुबह साढ़े पांच बजे एक ट्रेन चलती है। नैनी दून जनशताब्दी ट्रेन भी शुरू की जाए। दूर दराज से आने वाली जनता को ट्रेन पकड़ने में काफी दिक्कत होती है। काठगोदाम से देहरादून तक चलने वाली नैनी दून का काठगोदाम से आरंभ होने का समय कम से कम सात बजे तक किया जाए। उन्होंने रामनगर-गैरसैंण प्रस्तावित रेल मार्ग का सर्वे विस्तार गैरसैंण-गरुड़-बागेश्वर तक शामिल करने की मांग की है।
Dec 12 2020 (20:09) बड़ी रेल लाइन के आंदोलन में दिखी थी कौमी एकता की मिसाल, रामलीला और मोहर्रम दोनों रहे स्थगित (m.jagran.com)
Commentary/Human Interest
NER/North Eastern
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News Entry# 428242  Blog Entry# 4811035   
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Dec 12 2020 (20:09)
Station Tag: Ramnagar/RMR added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Ramnagar/RMR  
जागरण संवाददाता, रामनगर (नैनीताल) : अतीत के पन्ने पलटे तो उस दौर में हिंदू-मुस्लिम एकता की जो कौमी मिसाल देखने को मिली थी वो आज शायद ही देखने को मिले। 33 साल पहले रामनगर में बड़ी रेल लाइन को लेकर जबरदस्त आंदोलन चला था। उस दौर में बड़ी रेल लाइन लाने के लिए पूरे एक महीने आंदोलन चला। सत्रह दिन बाजार बंद रखा गया। सुबह के आठ बजते ही व्यापारी, किसान, मजदूर, छात्र सभी रेलवे स्टेशन पर धरना देते, रोजाना रेल रोकते थे। दरअसल, 1970 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रामनगर एमपी इंटर कालेज में जन सभा के दौरान घोषणा की थी कि रामनगर मुरादाबाद रेल लाइन को बड़ी रेल लाइन में बदला जाएगा। 17 साल बीतने के बाद भी जब बड़ी रेल लाइन नहीं आई तो 1987 में लोगो के सब्र का बांध टूट गया और बड़ी रेल लाइन को लेकर एक ऐतिहासिक आंदोलन शुरू हो गया।
आंदोलन
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पूरी तरह अहिंसक था। रेल रोको ओर दिन भर रेलवे स्टेशन पर धरना देना सभी का संकल्प था। जब माग पूरी न होते दिखी तो रामनगर के आवाम ने घोषणा कर दी कि जब तक बड़ी रेल लाइन नही आएगी तब तक न तो हिन्दू रामलीला करेंगे और मुस्लिम मोहर्रम नहीं मनाएंगे। बस फिर क्या था। केंद्र सरकार भी जनता के इस निर्णय से आवाक रह गयी। कई दौर की वार्ता विफल हो गयी। आंदोलन जारी रहा। रेलवे स्टेशन पर ही लंगर चलता रहा। लोग धरने पर डटे रहे। तब केंद्र में तत्कालीन वित्त एवं वाणिज्य मंत्री रहे एनडी तिवारी ने आश्वासन दिया कि वो अब रामनगर तब ही आएंगे जब तब यहां बड़ी रेल लाइन नहीं आ जाएगी। तब कहीं जाकर आंदोलन समाप्त हुआ। अपने वादे के पक्के एनडी तिवारी 3 जून 1988 को रामनगर में बड़ी रेल लाइन लेकर आए और तत्कालीन रेल मंत्री माधव राव सिंधिया व रेल उपमंत्री महावीर प्रसाद को भी लेकर आए। उस दौर का आंदोलन कौमी एकता का आंदोलन रामनगर के इतिहास में आज भी मिसाल है।
Dec 11 2020 (08:40) Indian Railways : रेलवे की नौ पर‍ियोजनाओं पर सर्वे टीम ने जताई आपत्ति, तीन पर सहमत‍ि (m.jagran.com)
Commentary/Human Interest
NR/Northern
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News Entry# 427984  Blog Entry# 4809280   
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Dec 11 2020 (08:40)
Station Tag: Nagina/NGG added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Dec 11 2020 (08:40)
Station Tag: Saharanpur Junction/SRE added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Dec 11 2020 (08:40)
Station Tag: Haldwani/HDW added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Dec 11 2020 (08:40)
Station Tag: Pilkhani/PKY added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Dec 11 2020 (08:40)
Station Tag: Tanakpur/TPU added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Dec 11 2020 (08:40)
Station Tag: Ramnagar/RMR added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Dec 11 2020 (08:40)
Station Tag: Kashipur Junction/KPV added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Dec 11 2020 (08:40)
Station Tag: Dehradun Terminal/DDN added by Anupam Enosh Sarkar/401739
मुरादाबाद (प्रदीप चौरसिया)।  Survey of railway projects। उत्तर प्रदेश की सीमा से लेकर और उत्तराखंड के पहाड़ों तक रेलवे की नई परियोजना सर्वे में दम तोड़ रहींं हैंं। पांच साल के सर्वे में नौ नई रेलवे लाइन की परियोजनाओं पर सर्वे टीम ने सहमत‍ि नहीं जताई। इसके पीछे कई कारण है। इनमें से प्रमुख वजह यह है क‍ि ये लाभ वाली परियोजनाएं नहीं हैं। राठी साहिब समेत तीन नई रेलवे लाइन पर सर्वे टीम ने सहमति जताई है।
जनप्रतिनिधियों के अनुरोध या रेलवे अधिकारियों द्वारा भेजे गए नई रेल लाइन के प्रस्ताव पर रेल प्रशासन सर्वे कराती है। रेलवे की सर्वे करने वाली टीम का कार्यालय दिल्ली के कश्मीरी गेट पर स्थित है। वित्तीय वर्ष 2014-2015- से वित्तीय वर्ष 2019-2020 तक 11 नई रेलवे
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लाइन और एक दोहरीलाइन का प्रस्ताव था। सभी प्रस्ताव उत्तर प्रदेश की सीमा क्षेत्र से शुरू होकर उत्तराखंड के पहाड़ों के विभिन्न क्षेत्रों के हैंं। सर्वे टीम ने सर्वे करने का काम लगभग पूरा कर लिया है।
तीन रेलवे लाइन पर सहमति जताई
 सर्वे टीम ने तीन रेलवे लाइन पर सहमति जताई है। हल्द्वानी से रीठा साहिब तक 66 किलोमीटर है। इसमें 3762 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। राठी साहिब धार्मिक स्थल है। यहां पर्यटक काफी पहुंचेंगे। इसी तरह देहरादून-उत्तरकाशी तक 83 किलोमीटर नई रेलवे लाइन डाली जानी है। इस पर 4653 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। काशीपुर से धामपुर तक 57 किलोमीटर नई रेल लाइन का प्रस्ताव है। इसके निर्माण पर 1281 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
 नौ नए रेल मार्ग पर नहीं म‍िली सहमत‍ि 
 सर्वे की टीम ने रामनगर-चौखुटिया तक 212 किलोमीटर रेल मार्ग के निर्माण पर 13141 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है। इस परियोजना को शुरू करने पर रेलवे को 7.56 फीसद का नुकसान हो सकता है। टीम ने इस परियोजना पर सहमति नहीं दी है। इसी तरह से टनकपुर से जोलजिवी तक  107 किलोमीटर, लागत 6276 करोड़, पिलखानी से कलसी तक 90 किलोमीटर, लागत 1800 करोड़, देहरादून से कलसी तक 47 किलोमीटर-लागत 5278 करोड़, देहरादून से पुरोला तक 120 किलोमीटर-लागत 7760 करोड़, हल्द्वानी से चोरगलिया तक 21 किलोमीटर-लागत 483 करोड़, देहरादून से सहारनपुर तक 80 किलोमीटर-लागत 4829 करोड, नगीना से अफजलगढ़ तक 72 किलोमीटर-लागत 1567 करोड़ का अनुमान है। सर्वे टीम ने सभी परियोजना को 6 से 10 फीसद तक नुकसान वाला बताया है। इसी कारण से इस परियोजना पर अपनी सहमति नहीं दी है।
सहायक वाणिज्य प्रबंधक नरेश सिंह ने बताया कि सर्वे टीम ने सर्वे कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। कुछ परियोजना पर असहमति जतायी है, कुछ परियोजना पर सहमति जतायी है। अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड व सरकार को लेना है।

Dec 05 2020 (13:11) 1906 में बिछी थी छोटी लाइन, उस समय रेल देखने उमड़ती थी भीड़ (www.jagran.com)
Commentary/Human Interest
NER/North Eastern
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News Entry# 427243  Blog Entry# 4803234   
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Stations:  Lal Kuan Junction/LKU   Ramnagar/RMR  
रामनगर (नैनीताल) :
अतीत के साये में ...
ब्रिटिश हुकूमत के समय 1906 मे लालकुआ से जब छोटी रेल लाइन बिछाई गई और भाप वाले इंजन से सीटी बजाती रेल जब पहली बार रामनगर आयी तो वह लोगो के कौतूहल का विषय बनी रही। रेल देखने के लिए नगर के सारे लोग रेलवे स्टेशन की ओर दौड़ पड़े। कई समय तक रेल के आने जाने के समय लोगो की भीड़ रेलवे स्टेशन पर जमा हो जाया करती थी। यहां तक कि पहाड़ से भी लोग रेल देखने रामनगर पहुचे थे। लोगो मे
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आश्चर्य था कि लोहे की पतली सी लाइन पर रेल कैसे चलती होगी? उस समय तिजारती लकड़ी की रामनगर में बहुत अच्छी मंडी हुआ करती थी। यहां से मालगाड़ी के जरिये कीमती लकड़ी लालकुआ फिर बरेली भेजी जाने लगी। जिस समय रेल रामनगर आयी यानी 1906 में रामनगर की कुल आबादी 4038 थी। ज्यादातर काशीपुर से आने वाले व्यापारी ही यहां कारोबार किया करते थे। आजादी के बाद लकड़ी का कारोबार स्थानीय ठेकेदारों ने संभाला रेलवे स्टेशन के पास ही जंगलों से आने वाली लकड़ी पड़ी रहती थी। इस कारण इस स्थान का नाम रेलवे पड़ाव पड़ा। जिसे आज भी रेलवे पड़ाव कहा जाता है। उस दौरान यहां जंगलो में खैर के पेड़ बहुतायत में पाए जाते थे। जगलों में जगह-जगह कत्था बनाने के लिए झाले हुआ करते थे। साठ के दशक में कत्थे का कारोबार चरम पर था, जो रेल से मुरादाबाद, बरेली, दिल्ली, नेपाल, म्यांमार को सप्लाई होता था। उस दौर में कम आबादी होने के कारण लोग सकून से रहा करते थे। रेल की सीटी बजी नहीं की लोग समय का अंदाज भी इंजन की सिटी से लगा लिया करते थे।



Dec 05 2020 (11:50) 1906 में बिछी थी छोटी लाइन, उस समय रेल देखने उमड़ती थी भीड़ (m.jagran.com)
Commentary/Human Interest
NER/North Eastern
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News Entry# 427210  Blog Entry# 4803132   
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Dec 05 2020 (11:50)
Station Tag: Ramnagar/RMR added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Dec 05 2020 (11:50)
Station Tag: Lal Kuan Junction/LKU added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Lal Kuan Junction/LKU   Ramnagar/RMR  
संवाद सहयोगी, रामनगर (नैनीताल) : ब्रिटिश हुकूमत के समय 1906 मे लालकुआ से जब छोटी रेल लाइन बिछाई गई। और भाप वाले इंजन से सीटी बजाती रेल जब पहली बार रामनगर आयी तो वह लोगो के कौतूहल का विषय बनी रही। रेल देखने के लिए नगर के सारे लोग रेलवे स्टेशन की ओर दौड़ पड़े। कई समय तक रेल के आने जाने के समय लोगो की भीड़ रेलवे स्टेशन पर जमा हो जाया करती थी। यहां तक कि पहाड़ से भी लोग रेल देखने रामनगर पहुचे थे। लोगो मे आश्चर्य था कि लोहे की पतली सी लाइन पर रेल कैसे चलती होगी? उस समय तिजारती लकड़ी की रामनगर में बहुत अच्छी मंडी हुआ करती थी। यहां से मालगाड़ी के जरिये कीमती लकड़ी लालकुआ फिर बरेली भेजी जाने लगी। जिस समय रेल रामनगर आयी यानी 1906 में रामनगर की कुल आबादी 4038 थी। ज्यादातर काशीपुर से आने वाले व्यापारी ही यहां कारोबार...
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किया करते थे। आजादी के बाद लकड़ी का कारोबार स्थानीय ठेकेदारों ने संभाला रेलवे स्टेशन के पास ही जंगलों से आने वाली लकड़ी पड़ी रहती थी। इस कारण इस स्थान का नाम रेलवे पड़ाव पड़ा। जिसे आज भी रेलवे पड़ाव कहा जाता है। उस दौरान यहां जंगलो में खैर के पेड़ बहुतायत में पाए जाते थे। जगलों में जगह-जगह कत्था बनाने के लिए झाले हुआ करते थे। साठ के दशक में कत्थे का कारोबार चरम पर था, जो रेल से मुरादाबाद, बरेली, दिल्ली, नेपाल, म्यांमार को सप्लाई होता था। उस दौर में कम आबादी होने के कारण लोग सकून से रहा करते थे। रेल की सीटी बजी नहीं की लोग समय का अंदाज भी इंजन की सिटी से लगा लिया करते थे।
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