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Shabdbhedi Express: गति इसकी शब्दों को भेदती है, पूरब को पूर्वांचल से जोड़ती है - Dr. Abhishek Rai

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Entry# 3189357-0

OTD/Ootwar (2 PFs)
     ऊटवाड़

Track: Single Electric-Line

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State Highway 25, Daudpur, Alwar
State: Rajasthan


Zone: NCR/North Central   Division: Agra

No Recent News for OTD/Ootwar
Nearby Stations in the News
Type of Station: Regular
Number of Platforms: 2
Number of Halting Trains: 6
Number of Originating Trains: 0
Number of Terminating Trains: 0
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Rating: NaN/5 (0 votes)
cleanliness - n/a (0)
porters/escalators - n/a (0)
food - n/a (0)
transportation - n/a (0)
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railfanning - n/a (0)
sightseeing - n/a (0)
safety - n/a (0)
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Station News

Page#    Showing 1 to 1 of 1 News Items  
लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले में केन्द्रीय गृहराज्यमंत्री को पद से हटाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन के सोमवार को रेल रोको प्रदर्शन का यूपी में कोई खास असर नहीं दिखाई दिया। इक्का दुक्का घटनाओं को छोड़कर लगभग शांति ही रही। कई किसान नेताओं को पहले ही घरों में ही नजरबंद कर दिया गया।  रेलवे अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश के पश्चिमी इलाकों में कुछ जगह पांच से दस मिनट तक किसानों ने प्रदर्शन किया और ट्रेन रोकने का प्रयास किया लेकिन रेलवे पुलिस की गश्त के कारण वह सफल नहीं हुए। राजधानी लखनऊ के दो रेलवे स्टेशनों पर जा रहे किसानों को पुलिस ने बाहर ही रोक लिया, कानपुर में पूरी तरह शांति रही। वाराणसी में कई किसान नेताओं का नजरबंद कर दिया गया।  गाजीपुर-मऊ में किसानों ने प्रदर्शन किया और ज्ञापन दिया। वहीं किसानों के साथ हुई हिंसा वाले लखीमपुर में भी पूरी तरह शांति रही, क्योंकि वहां किसानों ने...
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यह आंदोलन वापस ले लिया था।
उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवम शर्मा ने पीटीआई-भाषा को बताया कि खुर्जा रेलवे स्टेशन पर किसानों ने गोमती एक्सप्रेस को दो से तीन मिनट तक रोका लेकिन पुलिस के समझाने के बाद किसान वहां से चले गए । झांसी के डबरा स्टेशन पर पांच मिनट तक किसानों ने प्रदर्शन किया, झांसी के गोहद और मलनपुर स्टेशन के बीच किसानों ने करीब दस मिनट तक प्रदर्शन किया और बाद में पुलिस के समझाने पर वहां से किसान हट गए।

उन्होंने बताया कि इसी तरह आगरा डिवीजन के मथुरा पलवल के बीच दो स्थानों पर किसानों ने प्रदर्शन किया । मथुरा पलवल के बीच रामगढ़ और उतारवर स्टेशन के बीच रेलवे फाटक पर किसानों ने करीब दस मिनट तक प्रदर्शन किया । जबकि पलवल स्टेशन के आगे रूंधी स्टेशन के पास भी किसानों ने प्रदर्शन किया। शर्मा ने बताया कि किसानों के इस आंदोलन से किसी प्रकार का नुकसान रेलवे को नहीं हुआ। लखनऊ के पुलिस आयुक्त डी के ठाकुर ने पीटीआई-भाषाको बताया कि लखनऊ के उतरेठिया और आलमनगर रेलवे स्टेशनों के बाहर से किसानों को समझा कर वापस कर दिया गया । उन्होंने बताया कि उतरेठिया और आलमनगर रेलवे स्टेशन के बाहर किसानों के जत्थे एकत्र हो रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें समझा कर वहां से वापस कर दिया। पुलिस ने किसानों का ज्ञापन ले लिया।
ठाकुर ने बताया कि राजधानी के सभी रेलवे स्टेशनों के बाहर पुलिस ने चाक चौबंद इंतजाम किये हैं। कानपुर के पुलिस आयुक्त असीम अरूण ने बताया कि कानपुर में किसानों के आंदोलन का कोई असर नहीं है, फिर भी एहतियातन सभी रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गयी है।  उधर लखीमपुर खीरी से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को खीरी जिले में रेल रोको आंदोलन का कोई बड़ा प्रभाव नहीं देखा गया क्योंकि रेलवे ने जिले में ट्रेनों की आवाजाही को रोक दिया था। किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के एक सदस्य निकाय भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने भी लखीमपुर खीरी जिले में रेल रोको आंदोलन को बंद करने की घोषणा की।
भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष अमनदीप सिंह संधू ने बताया, खीरी में मौजूदा हालात को देखते हुए एसकेएम ने खीरी जिले में रेल रोको आंदोलन रद्द कर दिया है। संधू ने बताया कि जिले में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने धान की फसल को प्रभावित किया था और किसान फसल के प्रबंधन में व्यस्त थे, जिसके कारण एसकेएम ने आंदोलन रद्द करने का फैसला किया। संधू ने कहा कि इसके अलावा, रेलवे ने खीरी में ट्रेनों की आवाजाही को निलंबित कर दिया है, इसलिए ट्रेनों को रोकने का कोई फायदा नहीं है। रविवार शाम अमनदीप सिंह संधू ने एक वीडियो संदेश जारी कर रेल रोको आंदोलन वापस लेने की जानकारी दी थी।
इस बीच, एसकेएम द्वारा सोमवार को रेल रोको आंदोलन के आह्वान के मद्देनजर खीरी जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारी अलर्ट पर रहे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेलवे स्टेशनों और पटरियों पर भारी पुलिस, पीएसी, रेलवे पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। मऊ में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले ट्रेन रोकने जक्शन पर पहुंचे किसान नेताओं को पुलिस ने रोक दिया। विरोध में किसानों ने जमकर केंद्र सरकार के विरोध में नारेबाजी की बाद में मौके पर मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान मौके पर सुरक्षा बल काफी संख्या में तैनात रहे।
गौरतलब हैं कि केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान संघों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एक बयान में कहा था कि लखीमपुर खीरी मामले में जब तक न्याय नहीं मिल जाता, तब तक प्रदर्शन तेज किए जाएंगे।
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