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News Posts by Need stoppage of Singrauli Exp

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Apr 30 (07:24) भूमि अधिग्रहण:ब्राॅडगेज रेल प्रोजेक्ट रेलवे ने मांगी 246 हेक्टेयर जमीन 193 हेक्टे. पर कब्जा, 53 हेक्टे. जमीन लेने नहीं आ रहे रेल अधिकारी (dainik-b.in)
Commentary/Human Interest
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News Entry# 484698  Blog Entry# 5328766   
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Apr 30 2022 (07:24)
Station Tag: Jora Alapur/JPO added by Need stoppage of Singrauli Exp/1887927

Apr 30 2022 (07:24)
Station Tag: Kailaras/KQS added by Need stoppage of Singrauli Exp/1887927

Apr 30 2022 (07:24)
Station Tag: Gwalior Junction/GWL added by Need stoppage of Singrauli Exp/1887927
बानमोर से सबलगढ़ तक बड़ी रेल बिछाने के लिए रेलवे को 246 हेक्टेयर निजी जमीन में से 193 हेक्टेयर जमीन का कब्जा दिला दिया गया है। शेष 53 हेक्टेयर निजी जमीन पर कब्जा लेने के लिए रेलवे के अधिकारी, भू-अर्जन अधिकारी के पास नहीं पहुंच रहे हैं इस कारण इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की फाइल अब तक बंद नहीं हो सकी है।
ब्रॉडगेज रेल प्रोेजेक्ट के लिए रेलवे ने बानमोर, जौरा, कैलारस व सबलगढ़ में प्रशासन से 246 हेक्टेयर निजी जमीन मांगी थी। उसमें से रेलवे को अब तक 243 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराने का दावा प्रशासन कर रहा है। तथ्याें पर भरोसा करें तो 246 में से 193 हेेक्टेयर निजी भूमि पर रेलवे को कब्जा दिला दिया गया है।
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53 हेक्टेयर जमीन में से 37 हेक्टेयर पर कब्जा लेने के लिए रेलवे के अधिकारी, राजस्व अफसरों के पास नहीं पहुंच रहे हैं। 16 हेक्टेयर अधिग्रहित जमीन ऐसी है जिनके खातों में सभी खातेदार एकमत नहीं होने के कारण मुआवजा का पैसा लेने नहीं आ रहे हैं।
मुआवजा नहीं बंटने के कारण ऐसे 16 हेक्टेयर जमीन का कब्जा दिलाने में तहसीलदार व पटवारियों को दिक्कत जरूर आ रही है। वहीं सुमावली क्षेत्र के टिकटौली गांव में ब्राॅडगेज रेल प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई निजी जमीन के खाते में कुल मिलाकर 300 लोगों के नाम लिखे हैं।
खातेदारों की संख्या अधिक व मुआवजा राशि कम होने के कारण प्रत्येक खातेदार के हिस्से में 200 से 500 रुपए आ रहे हैं। खातेदारों में शादीशुदा लड़कियां भी शामिल हैं और उनकी ससुराल दूर है इसलिए दो-चार सौ रुपए का मुआवजा लेने के लिए वह 1000-500 रुपए खर्च कर जौरा नहीं आना चाहती हैं।
मुआवजा लेने के लिए प्रत्येक खातेदार को बैंक में 1000-1000 रुपए से खाता खुलवाना होगा। यहां संकट है कि 500 रुपए का मुआवजा लेने के लिए किसान खातेदारों को 1000 रुपए का खाता खुलवाने में खर्च करने होंगे और 500 रुपए आने-जाने में।
अधिग्रहित जमीन का मुआवजा नहीं बट पाने के कारण राजस्व विभाग ऐसे जमीनों के कब्जे रेलवे को नहीं दिला पा रहा है। वहीं रेलवे ने जौरा-कैलारस के बीच अगरौता व गैपरा में बड़ी रेल लाइन के लिए 2 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 22 फरवरी को निजी जमीन अधिग्रहण के प्रस्ताव आने के बाद राजस्व विभाग ने धारा 11 की कार्रवाई प्रचलित कर दी है।
ट्रेक बनाने का काम गति परजौरा से कैलारस के बीच मि्टटी का ट्रेक बनाने का काम इन दिनों गति पर है। यही स्थिति बानमोर से जौरा के बीच है। क्योंकि ठेकेदार चाहता है कि 15 जून से शुरू होने वाली बारिश का पानी अर्थ ट्रेक पर गिरेगा तो इससे मि्टटी का कुटाव ठीक हो जाएगा। चूंकि इस समय नैरोगेज की रेल पटरी उखाड़ने का काम 70 फीसदी से अधिक पूरा हो चुका है इसलिए उस जगह को समतल कर अर्थट्रेक बनवाया जा रहा है।
जानिए... पुलों के निर्माण की प्रगतिबानमोर व पुरानी छावनी के बीच नेशनल हाईवे-3 पर न्यू बामौर स्टेशन के पास आरओबी निर्माण के लिए 100 फीट गहराई में दो पिलर खड़े करने का काम चल रहा है। बानमोर से सुमावली के बीच सांक नदी पर पुल नंबर 6 बनाने का काम तेजी से चल रहा है।
रानीपुरा में 27 नंबर पुल बनाने का काम पूरा होने को है। आसन नदी पर 45 नंबर पुल बनाने का काम भी गति पर है इस बड़े पुल के दो पिलर ए-1 व ए-2 120 फीट ऊंचाई तक ऊपर आ चुके हैं। तीसरे पिलर काे खड़ा करने का काम जून तक पूरा कर लिया जाएगा।
सुमावली-जौरा के बीच मुरैना ब्रांच कैनाल के ऊपर के दो पिलरों का पुल तैयार किया जा रहा है। पहले पिलर की फाउंडेशन का काम चल रहा है इसे 30 अप्रैल तक पूरा करने का दावा किया गया है। जौरा में अलापुर रेलवे क्रॉसिंग के पास 58 नंबर पुल बनाने का काम निर्माण एजेंसी ने 90 फीसदी पूरा कर लिया है।
10 दिन में इसे कंपलीट कर लिया जाएगा। इसके साथ ही जौरा से सिकरौदा के बीच सोन नदी पर बनाया जा रहे बड़े पुल का काम भी पूरा होेने की स्थिति में है।
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श्योपुर. श्योपुर जिले के विकास के लिए महत्वाकांक्षी ग्वालियर-श्योपुर-कोटा रेल प्रोजेक्ट में भले ही ग्वालियर-श्योपुर के बीच गेज परिवर्तन के काम ने गति पकड़ ली है, लेकिन श्योपुर से कोटा तक नई लाइन बिछाने के काम को अभी धरातल पर उतरने का इंतजार बढ़ता जा रहा है। ग्वालियर-श्योपुर लाइन पूरी होने के बाद जल्द ही यहां ट्रेनें दौडऩे लगेगी।
यूं तो वर्ष 2010 में ही ग्वालियर-श्योपुर-दीगोद (कोटा) रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई थी, लेकिन वर्ष 2018 में इसका काम धरातल पर शुरू हुआ है। इस प्रोजेक्ट के तहत ग्वालियर से श्योपुर तक नैरोगेज रेल लाइन का गेज परिवर्तन कर ब्रॉडगेज लाइन बिछाई जानी है, जबकि श्योपुर से आगे दीगोद (कोटा) तक नई रेल लाइन बिछाई जानी है। वर्ष 2018 से
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बीते चार वर्षों में अभी ग्वालियर-श्योपुर लाइन के गेज परिवर्तन पर ही फोकस किया गया है और श्योपुर-कोटा नई लाइन का काम शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में लोगों का कहना है कि यदि श्योपुर-कोटा की नई लाइन बिछाने का काम भी धरातल पर शुरू हो तो पूरा प्रोजेक्ट एक साथ पूरा हो सकेगा और जिलेवासियों को रेललाइन की सुविधा मिल सकेगी।
साढ़े तीन हजार करोड़ का है पूरा प्रोजेक्ट
बताया गया है कि ग्वालियर से श्योपुर गेज परिवर्तन और श्योपुर से दीगोद (कोटा) नई रेल लाइन प्रोजेक्ट की कुल स्वीकृति लागत 3597 करोड़ 15 हजार रुपए की है। इसमें से 224 करेाड़ 39 लाख 61 हजार रुपए मार्च 2021 तक व्यय हो चुके हैं। जबकि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 296 करोड़ रुपए का बजट मिला था, लेकिन अब पिछले दिनों केंद्र सरकार ने बजट में इस प्रोजेक्ट में वर्ष 2022-23 के लिए 700 करोड़ रुपए का प्रावाधान किया है, जिससे प्रोजेक्ट का काम श्योपुर-कोटा लाइन पर भी शुरू होने की उम्मीद जगी है।
94 किमी की होगी श्योपुर-कोटा लाइन
बताया गया है कि ग्वालियर-श्योपुर-दीगोदा (कोटा) रेल लाइन प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 284 किलोमीटर है। इसमें से लगभग 190 किलोमीटर में जहां ग्वालियर-श्योपुर के बीच गेज परिवर्तन होना है, जबकि श्योपुर से दीगोद के बीच 94 किलोमीटर की नई लाइन बिछेगी। बताया गया है कि इस लाइन पर 8 नए स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव है।
ये पूरा प्रोजेक्ट ग्वालियर-श्योपुर गेज कन्वर्जन सहित श्योपुर-कोटा तक लाइन विस्तार के नाम से है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए ही इस बजट में 700 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
शिवम शर्मा, सीपीआरओ, रेलवे इलाहाबाद


ग्वालियर महानगर में रियासत कालीन नैरोगेज ट्रेन की विरासत को हेरिटेज टूरिस्ट ट्रेन के रूप में सहेजने के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रेल मंत्री को पत्र लिखा है। सबसे पहले तो उन्होंने इस ऐतिहासिक ट्रेन के कोच व इंजन की नीलामी पर रोक लगाने के लिए कहा है। इसके बाद मांग की है कि इस ऐतिहासिक ट्रेन के जरिए पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। पिछले कुछ सालों से सिंधिया लगातार ग्वालियर-चंबल अंचल के लिए पर्यटन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
ग्वालियर महानगर में रियायत कालीन नैरोगेज ट्रेन की विरासत संरक्षित रहे और शहर के लोगों को परिवहन सुविधा एवं देश- विदेश से आने वाले पर्यटकों को पर्यटन की दृष्टि से भी इसका लाभ मिल सके, इसके लिए
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भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले काफी समय से प्रयासरत हैं। इसी क्रम में पूर्व में भी सिंधिया ने ग्वालियर नगर में मेट्रों ट्रैन या टूरिज्म डिपार्टमेंट के माध्यम से नगर के पुराने नैरोगेज ट्रैक पर हेरिटेज ट्रेन चलाने के लिए योजना तैयार करने की मांग की थी, जिसके बाद मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन फिजियाबिल्टी स्टडी करने के लिए भेजा है, जिसका कार्य प्रगति पर है, इस उद्देश्य से केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सहयोग से अभी शहर का कंपरेन्सिव मोबिलिटी प्लान बनाने का कार्य भी प्रगति पर है, जो कि आगामी 4 महीने में पूरा हो जाएगा, जिसके आधार पर ग्वालियर नगर में नैरोगेज हैरिटेज ट्रैन एवम मेट्रो ट्रेन आदि के संचालन के लिए उपयुक्त ट्रेनों का चयन किया जाएगा।नीलामी रोकने की कही बातकेन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि ग्वालियर नगर में प्रस्तावित हेरिटेज ट्रैन या मेट्रों ट्रेन के विषय मे जब तक अंतिम निर्णय नही हो जाता है तब तक इन कोचों की नीलामी न की जाए, यदि उक्त संदर्भ में सकारात्मक निर्णय होता है तो उक्त कोचों एवं रेल इंजन की जरुरत पड़ेगी, इसलिए इस नीलामी प्रक्रिया को अविलंब रोका जाना आवश्यक है।
Feb 16 (11:06) Scindia ने रेल मंत्री को लिखा पत्र, ऐतिहासिक नैरोगेज ट्रेन के लिए की ये मांग (mpbreakingnews.in)
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News Entry# 477832  Blog Entry# 5219528   
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Feb 16 2022 (11:06)
Station Tag: Gwalior Junction/GWL added by Need stoppage of Singrauli Exp/1887927
Stations:  Gwalior Junction/GWL  
ग्वालियर, अतुल सक्सेना। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनके पूर्वजों द्वारा ग्वालियर से शुरू की गई नैरोगेज ट्रेन को पुनर्जीवित करना चाहते हैं। सिंधिया नैरोगेज ट्रैन को हेरिटेज ट्रेन (Heritage Train) के रूप में ग्वालियर में चलाना चाहते हैं।  उन्होंने इसके लिए प्रयास भी शुरू किये हैं, उन्होंने पूर्व रेल मंत्री पीयूष गोयल को इस संबंध में पिछले साल 10 फरवरी 2021 को एक पत्र लिखा था, लेकिन अब एक स्थानीय अख़बार में बंद हो चुकी नैरोगेज ट्रेन (Narrow Gauge Train) के कोचों को नीलाम करने की खबर के बाद फिर से रेल मंत्रालय को पत्र लिखा है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Railway Minister Ashwini Vaishnaw) को आज मंगलवार 15 फरवरी को एक
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पत्र लिखा है।  उन्होंने लिखा कि मैंने ग्वालियर – श्योपुर मांर्ग पर चलने वाली नैरोगेज ट्रेन को रेलवे द्वारा बंद किये जाने के बाद उसे हेरिटेज ट्रेन के रूप में चलाने का प्रस्ताव दिया है।  इस संबंध में मैंने पूर्व रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र भी लिखा था। मैंने इसका एक कॉन्सेप्ट प्लान भी तैयार कराकर मप्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ( मेट्रो रेल कार्पोरेशन) को इसकी फिजियेबिलिटी स्टडी कराने के लिए भेजा है।
सिंधिया ने लिखा कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सहयोग से अभी शहर का कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (Comprehensive Mobility Plan) का कार्य प्रगति पर है जो 4 महीने में पूरा हो जायेगा।  इसके आधार पर ग्वालियर में हेरिटेज ट्रेन/ मेट्रो ट्रेन के चलाने के लिए उपयुक्त रुट का चयन किया जायेगा।  लेकिन एक स्थानीय अख़बार में रेलवे द्वारा नैरोगेज ट्रेन के कोचों की नीलामी की खबर छापी गई है।
सिंधिया ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से अनुरोध किया कि ग्वालियर शहर से रायरू तक के रेलवे ट्रैक व इस पर पूर्व में चल रहे सभी कोचों और इंजन आदि को तब तक कृपया यथास्थिति में रखा जाये  जब तक इसको शहर  हैरिटेज ट्रेन के रूप में चलाने के प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो जाता।  इसमें 6 से 8 महीने लग सकते हैं तब तक कोई नीलामी ना की जाये।
पत्र के अंत में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखा कि यदि आप IRCTC या रेलवे के अन्य किसी उपक्रम से नैरोगेज ट्रेन को ग्वालियर शहर में एक हेरिटेज ट्रेन के रूप में  चलाने के निर्देश देंगे तो मैं बहुत अनुग्रहित होऊंगा।
पुराने मालगोदाम के स्थान पर आधुनिक वॉशिंग पिट बनाने का काम एक साल में पूरा करना था, जो दो साल में भी पूरा नहीं हो सका है। इससे ग्वालियर-अहमदाबाद एक्सप्रेस तीन साल बाद भी नियमित नहीं हो सकी। इस ट्रेन को तीन साल से ग्वालियर से नियमित करने की मांग चल रही है। अभी अहमदाबाद के लिए ग्वालियर से बुधवार, शनिवार और रविवार को ट्रेन है।
सप्ताह में तीन दिन ट्रेन होने के कारण यात्रियों को लंबी वेटिंग का टिकट मिल रहा है, जबकि यह ट्रेन आगरा तक नियमित रूप से हर दिन अहमदाबाद से आती और जाती है। इसके साथ ही ग्वालियर से गुवाहाटी के लिए इटावा होकर ट्रेन चलाने की योजना है, लेकिन वॉशिंट पिट नहीं बनने के कारण यह
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मामला अटका है।
24 कोच वाली ट्रेनों का मेंटेनेंस ग्वालियर स्टेशन पर नहीं हो पाता इसलिए समस्या
रेलवे द्वारा ग्वालियर में आधुनिक सुविधा से लैस एलएचबी रैक का मेंटेनेंस करने के लिए वॉशिंग पिट तैयार करवा रहा है। अभी ग्वालियर स्टेशन में तीन वॉशिंग पिट हैं, लेकिन यह छोटे आकार की हैं। इसमें कन्वेंशनल कोच का मेंटेनेंस हो पाता है। इससे एलएचबी रैक वाली ट्रेनों का मेंटेनेंस ग्वालियर में नहीं हो पाता। एलएचबी कोच लंबे होते हैं।
ऐसी ट्रेन 24 कोच की हैं, जबकि कन्वेंशनल वॉशिंग पिट में 17 से 21 कोच तक की ट्रेन का मेंटेनेंस करने की क्षमता है। इससे अभी तक ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ पा रही थी। यहां 5 करोड़ की लागत से एक मेंटेनेंस साइडिंग का काम चल रहा है। रेलवे ने मार्च 2022 में इस वॉशिंग पिट का काम पूरा करने का लक्ष्य दिया है, लेकिन काम नियमित नहीं चल रहा है। इससे रेल प्रशासन फिर से काम पूरा करने की समय सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
मई-जून तक वॉशिंग पिट का काम पूरा होने की संभावना
वॉशिंग पिट का काम मई-जून तक पूरा होने की उम्मीद है। दो साल से कोरोना चल रहा है जिसके चलते काम प्रभावित हुआ है। नई ट्रेनें चलाने का निर्णय बोर्ड स्तर पर होगा।-मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, झांसी मंडल
गुवाहाटी से ट्रेन चलाने की योजना लेकिन वॉशिंग पिट बनने का इंतजार
गुवाहाटी से ग्वालियर के लिए भी नई ट्रेन चलाने की योजना है। अभी ग्वालियर से गुवाहाटी जाने के लिए एक भी ट्रेन नहीं चल रहीं है। इसके लिए छह माह पहले झांसी मंडल ने ग्वालियर रेलवे स्टेशन के अफसरों से जानकारी मांगी थी, लेकिन वॉशिंटपिट नहीं बन पाने के कारण इस ट्रेन के चलाने पर मेंटेनेंस का काम नहीं हो पाएगा।
रेलवे की एलएचबी रैक के साथ ग्वालियर से गुवाहटी के लिए ट्रेन चलाने की योजना है। रेलवे 90 करोड़ खर्च कर ग्वालियर-इटावा रेल ट्रैक पर ओएचई लाइन बिछाने का काम भी पूरा हो चुका है। साथ ही ट्रैक पर अभी तीन ट्रेनें ही नियमित चल रही हैं। रेल ट्रैक पूरी तरह से खाली है।
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