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Ballari Jn - Look around and enjoy the station. A sacred place where Mahatma Gandhi once spent 8 hours. - Vishwanath Joshi

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Sun Jan 19 01:33:33 IST
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News Posts by Vcpl Jbp

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पलपल संवाददाता, जबलपुर. रेल प्रशासन ने यात्रियों कीे जबर्दस्त मांग को देखते हुए कानपुर सेंट्रल से इलाहाबाद, जबलपुर होकर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुंबई के लिए सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है. फिलहाल यह ट्रेन 11-11 (अप व डाउन) ट्रिप के लिए चलेगी.
रेल प्रशासन के मुताबिक इस गाड़ी में 01 वातानुकलित द्वितीय श्रेणी, 01 वातानुकूलित तृतीय श्रेणी, 10 शयनयान श्रेणी, 04 सामान्य श्रेणी एवं 02 एसएलआर सहित 18 कोचों के साथ चलेगी.
इस दिन चलेगी
गाड़ी
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संख्या 04151- कानपुर सेन्ट्रल से प्रत्येक शनिवार को दिनांक 18.01.20 से 28.03.20 तक व गाड़ी संख्या 04152-क्षत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से प्रत्येक रविवार को दिनांक 19.01.20 से 29.03.20 तक चलेगी.
यह रहेगा समय
गाड़ी संख्या 04151 कानपुर सेंटल से प्रत्येक शनिवार दोपहर 13.00 बजे रवाना होकर, अपरान्ह 15.45 बजे इलाहाबाद, मानिकपुर होकर सायं 19.20 बजे सतना, रात 20.50 बजे कटनी होते हुए रात्रि 22.15 बजे जबलपुर पहुंचेगी, फिर पिपरिया, इटारसी, भुसावल होते हुए अगले दिन अपरान्ह 15.20 बजे मुंबई पहुंचेगी, जबकि वापसी में गाड़ी संख्या 04152 मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्र्मिनस से रविवार को अपरान्ह 16.40 बजे रवाना होगी, जो इसी मार्ग से अगले दिन सोमवार की सुबह 8.50 बजे जबलपुर,, 10.40 बजे कटनी, 12.45 बजे सतना, मानिकपुर होकर सायं 17.20 बजे इलाहाबाद पहुंचेगी औैर वहां से रवाना होकर रात्रि 20.30 बजे कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी.
  
पलपल संवाददाता, जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल के डीआरएम संजय विश्वास ने कहा कि रेल प्रशासन का मुख्य उद्देश्य रेल यात्रियों को सुरक्षित व संरक्षित रेल यात्रा सुगमतापूर्वक मुस्कान के साथ कराना है. इसके लिए रेल प्रशासन निरंतर प्रयास कर रहा है और करता रहेगा. जबलपुर मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में जहां इजाफा किया जा रहा है, वहीं स्वच्छता पर खास ध्यान दिया जा रहा है. यह बात श्री विश्वास पत्रकारों से चर्चा करते हुए कह रहे थे. इस मौके पर एडीआरएम अंजू सुरेंद्र मोहनपुरिया, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक बसंत कुमार शर्मा, सीनियर डीसीएम (कोचिंग) एमके गुप्ता, डीसीएम देवेश सोनी व पब्लिसिटी इंस्पेक्टर सादिक खान भी मौजूद रहे.
जबलपुर मंडल के डीआरएम का पदभार ग्रहण करने के
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पश्चात पहली बार पत्रकारों से मुखातिब श्री विश्वास ने बताया कि जबलपुर स्टेशन पर जो रिमॉडलिंग का काम चल रहा है, साथ ही प्लेटफार्म नंबर 1 पर वाशिंग एप्रान का कार्य हो रहा है, वह शीघ्र ही पूरा हो जायेगा, जिसके बाद रेल यात्रियों को यात्रा में नई सुविधाएं मिल सकेंगी. साथ ही जो नया ए-वन प्लेटफार्म बना है, वहां पर मूलभूत सुविधाओं के निर्माण का काम भी तेजी से चल रहा है, वह भी जल्दी पूरा हो जायेगा.
फण्ड की कमी, यात्री सुविधाओं में कमी नहीं
एक सवाल के जवाब में डीआरएम श्री विश्वास ने कहा कि ईयर एंडिंग के समय मंडल के पास फंड की कमी हो जाती है, यह नियमित प्रक्रिया है, किंतु इसके बावजूद यात्री सुविधाओं में फंड की कमी नहीं होने दी जा रही है, इसका प्रबंध किया जा रहा है. मंडल के गाडरवारा व अन्य छोटे स्टेशनों पर कोच गाइडेंस सिस्टम, साफ-सफाई, वाटर वेंडिंग मशीन लगाई गई है.
सुरक्षित रेल संचालन हो, रनिंग स्टाफ का रख रहे पूरा ध्यान
डीआरएम संजय विश्वास ने कहा कि सुरक्षित रेल चलती रहे, इसके लिए नियमित रूप से ट्रेक सही हो, गाडिय़ां सुरक्षित चलें, इसके लिए ट्रेकमैन व रनिंग स्टाफ पर खास ध्यान दिया जा रहा है. रनिंग स्टाफ तनाव रहित रहें, उन्हें पर्याप्त विश्राम मिले, ड्यूटी के साथ-साथ वे अपने घरों में भी तनावरहित रहें, इसके लिए खास इंतजाम किये गये हैं. हाल ही में कटनी में रेल प्रशासन ने रनिंग स्टाफ के परिवारजनों के साथ सेमीनार आयोजित किया, जिसमें परिवारजनों, खासकर रेल चालकों की पत्नियों से फीडबैक लिया गया और उन्हें सलाह दी गई कि घर पर तनाव रहित वातावरण रखें, ताकि रेल चालक बेहतर व सुरक्षित ढंग से गाडिय़ां चलाएं.
30 साल की नौकरी या 55 वर्ष आयु का मामला
एक सवाल के जवाब में डीआरएम श्री विश्वास ने कहा कि जबलपुर मंडल में 30 साल की नौकरी या 55 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले एक भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटाया गया है और न ही फिलहाल ऐसी कोई योजना है. रेलवे बोर्ड के निर्देश पर एक कमेटी इस क्राइटेरिया में आने वाले रेल कर्मचारियों की सूची बनाती है, जिसमें कर्मचारी की कार्यशैली उसका वार्षिक सीआर, परफार्मेंस का रिव्यू किया जाता है. उस कमेटी के आधार पर ही निर्णय लेना होता है, लेकिन अभी जबलपुर में ऐसा निर्णय नहीं लिया गया है.
  
भोपाल. तलाक की खबरें तो आपने बहुत सी सुनी होंगी, लेकिन मध्य प्रदेश में एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया जिसे जानकर आपको संजय लीला भंसाली की फिल्म हम दिल दे चुके सनम की याद आ जाएगी. पहले तो हैरानी होगी, फिर सच्चाई जान पति की तारीफ करेंगे.
सिंदूर पति के नाम का, दिल में प्रेमी
दरअसल, यह मामला राजधानी भोपाल के फैमिली कोर्ट में आया है. जहां एक रेलवे में नौकरी करने वाले अधिकारी ने अदालत में जज से कहा- सर मैं अपनी पत्नी को इसलिए तलाक दे रहा है कि वह
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अपने प्रेमी के साथ जिंदगी भर साथ रह सके, क्योंकि वह सिंदूर तो पति का नाम का लगाती है, लेकिन उसके दिल में अभी भी शादी से पहले का बॉयफ्रेंड ही है. जिसको वह कभी भूल ही नहीं पाई. इसलिए मैं उसको उससे प्यार से मिलनाने का निर्णय लिया है.
6 महीने पहले हुई थी शादी
बता दें कि इस युवक की शादी साल 2019 में जुलाई के महीने में भोपाल शहर में हुई थी. लेकिन वह पत्नी का दिल नहीं जीत पाया. कुछ दिन बाद ही उसकी पत्नी ने कहा-मैं किसी और से प्यार करती हूं. क्या आप मुझको उससे मिलवा सकते हैं, क्योंकि वह आज भी अपन प्रेमी से उतना ही प्यार करती है, जितना वो शादी से पहले करती थी.
महिला ने बताई अपनी लव स्टोरी
काउंसिलिंग के दौरान महिला ने कहा-वह शादी से पहले एक निजी कंपनी में जॉब करती थी. वहीं उसकी मुलाकात साथ नौकरी करने वाले युवक से हुई. पहले हम दोनों सिर्फ दोस्त थे, फिर एक-दूसरे से प्यार करने लगे. जब हमने शादी करने का सोचा तो मेरे पापा ने मना कर दिया. कहने लगे की लड़का प्राइवेट नौकरी करता है, इसलिए तुम्हारी शादी किसी सरकारी कर्मचारी से ही होगी और रेलवे में काम करने वाले एक अफसर से मेरा विवाह करवा दिया. फिर मैंने यह बात अपने पति को बताते हुए कहा- जो मेरे माता-पिता ने मेरे लिए नहीं किया क्या आप मेरे लिए कर सकते हो. तो वह इसके लिए तैयार हो गए. हम दोनों ने तलाक के इस मामले को अभी अपने-अपन घरवालों को नहीं बताया है.
  
पलपल संवाददाता, जबलपुर. भारतीय रेलवे बिजली विभाग का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और उसे विभिन्न राज्यों के बिजली विभाग चौबीसों घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं, किंतु रेलवे पर बिजली खरीदने के बाद काफी बड़ी राशि नहीं चुकाने का आरोप लगा है. केवल मध्य प्रदेश बिजली विभाग के ही 882 करोड़ रुपए बकाया बताये जा रहे हैं, इतनी बड़ी राशि वसूलने के लिए एमपी की कमलनाथ सरकार नियामक आयोग जाने की तैयारी कर रही है.
जानकारी के मुताबिक प्रदेश से बिजली की खरीदी कर ट्रेन को दौड़ाने वाले भारतीय रेलवे पर प्रदेश की बिजली कंपनियों की बकाया राशि 882 करोड़ निकल रही है. रेलवे पर क्रॉस सब्सिडी और अतिरिक्त सरचार्ज के कारण 882 करोड़ का बकाया है, जिसे वसूलने के लिए
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अब सरकार ने बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं. ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि भारतीय रेलवे समेत सात बड़े बिजली उपभोक्ताओं पर निकल रही 188 करोड़ की राशि को वसूलने के लिए नियम प्रक्रिया के मुताबिक कार्यवाही करें.
7 बड़े बकायादार निशाने पर
ऊर्जा विभाग ने ओपन एक्सेस के जरिए बिजली लेने वाले 7 बड़े उपभोक्ताओं से बकाया राशि को वसूलने को कहा है. जिन प्रकरणों में बिजली के बड़े उपभोक्ताओं ने कोर्ट से स्थगन लिया है उन लंबित प्रकरणों में जल्द सुनवाई के लिए भी आवेदन लगाने के निर्देश दिये गए हैं. दरअसल प्रदेश में साल 2018 में बिजली कंपनियों पर कुल रूपये 37963 करोड़ घाटा था, जो साल 2019 में बढ़कर 44975 करोड़ से ज्यादा हो गया है.
घाटे को दूर करने शुरु की वसूली
बिजली कंपनियों के घाटे को दूर करने के लिए सरकार ने पहले बकाया बिजली बिलों की वसूली के निर्देश दिए हैं, जिसके अच्छे नतीजे सरकार को मिले हैं. इससे बिजली कंपनियों के राजस्व में खासा इजाफा हुआ है. अब बिजली कंपनियां उन बड़े बिजली बकायादारों से बिलों की लंबित वसूली लेने की तैयारी में है जो प्रदेश से बिजली की खरीद कर बकाया राशि देने में आनाकानी कर रहे हैं. प्रदेश से बिजली खरीदी के सबसे बड़े उपभोक्ता रहे भारतीय रेलवे ने प्रदेश में महंगी बिजली होने का हवाला देकर खरीदी को जारी रखने से किनारा कर लिया था, लेकिन अब तक रेलवे ने राज्य के बकाया राशि का भुगतान नहीं किया है. अब सरकार ने बिजली कंपनियों से कहा है कि वो बकाया राशि को वसूलने की कार्यवाही करें.
  
नई दिल्ली. रेलवे के ट्रैफिक, वित्त, कार्मिक, स्टोर समेत आठ काडरों के विलय से बने इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (आईआरएमएस) का अधिकारियों की ट्रेनिंग पर भी असर पड़ेगा. पहले अधिकारियों को उनके कार्य क्षेत्र के हिसाब से विशेषज्ञता हासिल कराने के लिए रेलवे के विभिन्न संस्थानों में ट्रेनिंग दी जाती थी. रेलवे के अधिकारी से लेकर बोर्ड के सदस्य अब इस बात से आशंकित है कि ट्रेनिंग का फॉर्मेट, कोर्स, शिड्यूल और अवधि क्या रखी जाए.
आईआरएमएस के गठन से पश्चिम मध्य रेलवे सहित सभी रेलवे जोनों के अधिकारियों में भारी नाराजगी है. इसे सोशल मीडिया और खतों के जरिये रेलमंत्री पीयूष गोयल और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव से जता रहे हैं. अधिकारियों ने कहा, जब नई ट्रेन शुरू करनी
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होती है तो यात्रियों तक से फीडबैक लिया जाता है. मगर सरकार ने इतना बड़ा फैसला लेने से पहले अपने अधिकारियों तक से फीडबैक लेना और उन्हें इस बाबत जानकारी देना भी उचित नहीं समझा. बस सर्जिकल स्ट्राइक की तरह काडरों का विलय कर दिया.
रेलवे अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए देश में आठ प्रमुख संस्थान हैं. मैकेनिकल इंजीनियरों की ट्रेनिंग जमालपुर (बिहार) में, सिविल इंजीनियरों की पुणे, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की नासिक और अकाउंट अफसरों की हैदराबाद में ट्रेनिंग होती है. इसी तरह अन्य संस्थानों में अलग-अलग विधाओं से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है. जब इन संस्थानों के प्रोफेसरों से बातचीत की गई तो उनमें से एक प्रोफेसर ने कहा कि अभी अधिकारियों को उनके कार्य क्षेत्र में विशेषज्ञता दिलाने के साथ अन्य काम सिखाने के लिए करीब डेढ़ साल का प्रशिक्षण दिया जाता है.
मात्र डेढ साल में हर क्षेत्र में कैसे बनेंगे विशेषज्ञ
अगर आईआरएमएस के लिहाज से अधिकारियों की ट्रेनिंग हुई तो उन्हें हर क्षेत्र में विशेषज्ञता की जरूरत होगी. ऐसे में प्रशिक्षण की अवधि बढ़ जाएगी. ऐसे में अधिकारियों को करीब डेढ़ साल में हर क्षेत्र में विशेषज्ञता कैसे हासिल कराई जा सकेगी. इसका सीधा असर उनके कामकाज और यात्री सुविधाओं पर पड़ेगा.
वहीं, एक अन्य प्रोफेसर का कहना है कि आईआरएमएस से ट्रेनिंग का पूरा शेड्यूल व फॉर्मेट प्रभावित होगा. रेलवे बोर्ड को आईआरएमएस लाने से पहले एक ब्ल्यू प्रिंट तैयार करना था. जिसके आधार पर रेलवे अधिकारियों की ट्रेनिंग, कोर्स और अवधि तय किया जाता. पुणे स्थित संस्थान के एक प्रोफेसर ने बताया कि अधिकारियों की उनके कार्य क्षेत्र के हिसाब से विभिन्न संस्थानों में ट्रेनिंग दी जाती है. अब आईआरएमएस से ये व्यवस्थाएं गड़बड़ा जाएंगी.
इन संस्थानों में होती है ट्रेनिंग
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, जमालपुर
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग (इरीसिन), पुणे
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (इरीन), नासिक
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्युनिकेशन , सिकंदराबाद
- इंडियन रेलवे ट्रैक मशीन्स ट्रेनिंग सेंटर, प्रयागराज
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनजमेंट (इरिफेम), हैदराबाद
- नेशनल एकेडमी ऑफ इंडियन रेलवे (नाइर), वडोदरा
- नेशनल रेल एंड ट्रांसपोर्टेशन इंस्टीट्यूट (एनआरटीआई), वडोदरा

  
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