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News Entry# 435033
यूपीए की तूलना में एनडीए सरकार का ओड़िशा में रेल विकास पर रहा है अधिक फोकसपिछले 10 साल में रेल बजट में ओड़िशा को मिलने वाले अनुदान में हो चुकी है 8 गुना की वृद्धि 1 फरवरी को संसद में निर्मला सीतारमण 2021-21 आर्थिक साल के लिए बजट पेश करेंगी।



भुवनेश्वर, शेषनाथ
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राय। दो सप्ताह बाद 1 फरवरी को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2021-21 आर्थिक साल के लिए बजट पेश करेंगी। इस बजट के साथ रेल बजट भी पेश की जाएगी। सन् 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जो आम बजट पेश की थी उसी में रेल बजट भी संलग्न थी और तभी से हर साल आम बजट में ही रेल बजट पेश की जा रही है।

हालांकि इस साल रेल बजट ओड़िशा के लिए कितनी सम्भावना लेकर आएगी उसे लेकर अभी से राजनीतिक चर्चा एवं द्वंद दोनों शुरू हो गए हैं। खासकर राज्य में सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल ने इस साल ओड़िशा के लिए रेल बजट में 7 हजार करोड़ रुपये अनुदान देने की मांग की है तो वहीं कांग्रेस ने 10 हजार करोड़ रुपये का अनुदान देने की मांग किया है। रेलवे ओड़िशा से हर साल करीबन 13 से 15 हजार करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह कर रहा है। पूरे देश में माल परिवहन से जितना राजस्व संग्रह होता है, ओड़िशा में उसकी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है। इस स्थिति में नए रेल मार्ग, आधे पड़े रेल प्रोजेक्ट, नई ट्रेनों के चलाने, रेल संप्रसारण आदि मांग में से केन्द्र सरकार कितनी मांगों को पूरा करती है, उस पर सभी की नजर है। केन्द्र की सत्ता में इस बार भाजपा के 8 सांसद हैं। इसमें से दो शक्तिशाली मंत्री भी हैं। ऐसे में यदि ओड़िशा की मांग पूरी नहीं होती है तो फिर सवाल उठने लाजिमी हैं।



हालांकि यूपीए सरकार की तूलना में एनडीए की सरकार ने ओड़िशा में रेलवे के विकास के अधिक ध्यान दिया है। रेल अनुदान को बढ़ाया है और प्रदेश को मिलने वाला अनुदान आर्थिक साल में खर्च नहीं हो पाता है और वापस लौट जा रहा है, जिसका आरोप बीजद के सांसद लगाते रहे हैं। वहीं भाजपा का आरोप रहा है कि रेल प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण करने में राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है। बीजद एवं भाजपा के नेताओं के इस तरह के आरोप प्रत्यारोप के बीच ओड़िशा में कई रेल परियोजनाओं के कार्य अधर में लटके पड़े हैं। जानकारी के अनुसार पिछले दो दशक के बाद खुर्दा-बलांगीर, विमलागड़-तालचेर रेलमार्ग का कार्य सम्पन्न नहीं हो पाया है। गोपालपुर-सिंगापुर, भद्राचलम-गोपालपुर रेल मार्ग को लेकर कोई स्पष्ट चित्र अभी तक सामने नहीं आया है। उसी तरह से राजधानी भुवनेश्वर एवं पुरानी राजधानी कटक के बीच मेट्रो ट्रेन सेवा अब भी यहां के लोगों के लिए सपना ही है।



इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए ओड़िशा के सांसद संसद में कई बार मांग कर चुके हैं, मगर इस पर कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है। वर्ष 2030 तक इन दोनों शहरों की आबादी 35 लाख से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है, ऐसे में इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होने की बात हर कोई कर रहा है।

जयपुर मालकानगिरी, जयपुर-नवरंगपरु रेलमार्ग के लिए राज्य सरकार एवं केन्द्र रेल मंत्रालय में एग्रीमेंट हुआ है। इस प्रोजेक्ट में आधा खर्च राज्य सरकार ने वहन करने का आश्वासन दिया है। बावजूद इसके इस प्रोजेक्ट के कार्य को जितनी गति मिलनी चाहिए, नहीं मिली है। इसके अलावा पूर्वतट रेलवे एवं पूर्व पश्चिम करिडोर निर्माण, पुरी-कोणार्क, पारादीप-धामरा, चम्पुआ-जाजपुर, बारीपदा-जाजपुर रोड, तालचेर-अनुगुल को जोड़ने वाले रेल मार्ग एवं जलेश्वर-दीघा नया रेल मार्ग, दैतारी-बांसपाणी रेलमार्ग को पूरा करने, सम्बलपुर-टिटिलागड़ तथा टिटिलागड़-रायपुर रेलमार्ग का दोहरीकरण एवं बारंग-भुवनेश्वर के बीच तीसरी रेल लाइन का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। ओड़िशा के तीन जगह रायगड़ा, राउरकेला, जाजपुर रोड रेल डिवीजन स्थापित करने की मांग पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिए गए हैं।



ओड़िशा को रेल बजट में 2009 से अब तक मिलने वाली राशि

जानकारी के अनुसार 2009-10 में रेल बजट में ओड़िशा को 657.6 करोड़ रुपये की अनुदान राशि मिली थी और 10 साल में इस अनुदान राशि में 8 गुना वृद्धि हुई है।

आंकड़े के मुताबिक 2009-10 रेल बजट में ओड़िशा को 657.6 करोड़ रुपया, 2010-11 रेल बजट में ओड़िशा को 900.3 करोड़ रुपये, 2011-12 रेल बजट में 1100.3 करोड़ रुपये, 2012-13 रेल बजट में 729.3 करोड़ रुपया, 2013-14 रेल बजट में 812.5 करोड़ रुपया, 2014-15 रेल बजट में 1465 करोड़ रुपया, 2015-16 रेल बजट में 3712 करोड़ रुपये, 2016-17 रेल बजट में 4682 करोड़ रुपया, 2017-18 रेल बजट में 5102 करोड़ रुपया, 2018-19 रेल बजट में 5252 करोड़ रुपया, 2019-20 रेल बजट में 4593 करोड़ रुपया और 2020-21 रेल बजट में ओड़िशा को 4373 करोड़ रुपया ओड़िशा को मिला है।



यहां उल्लेखनीय है कि हर साल जितना राशि ओड़िशा को रेल बजट में मिलती है उतनी राशि कभी भी खर्च नहीं हो पाने के आरोप लगते रहे हैं। कालाहांडी में बिजली से चलने वाले इंजन मरम्मत कारखाना, गंजाम के सीतापल्ली में वागन कारखाना, बलांगीर जिले के कंटाबाजी तथा सुन्दरड़ जिले के बंधमुंडा में कंक्रीट स्लीपर कारखाना तथा केबीके में कौशल विकास केन्द्र बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है। इतना ही नहीं कटक, पुरी, भद्रक, बरहमपुर, जाजपुर-केन्दुझर रोड, खुर्दारोड, रायगड़ा, सम्बलपुर, बालेश्वर, झारसुगुड़ा एवं राउरकेला रेलवे स्टेशनों के विकास के लिए जो योजना बनायी गई थी वह केवल फुट ओवरब्रीज एवं इलेक्ट्रानिक सीढ़ी तक सिमट कर रह गई है।


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