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News Entry# 415764
Aug 05 (05:11) राम के जुनून में रेलवे की नौकरी से बेपरवाह कूच कर गए अयोध्या (www.naidunia.com)
Commentary/Human Interest
WCR/West Central
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News Entry# 415764  Blog Entry# 4681451   
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Aug 05 2020 (05:11)
Station Tag: Ayodhya Junction/AY added by Adittyaa Sharma/1421836

Aug 05 2020 (05:11)
Station Tag: Jabalpur Junction/JBP added by Adittyaa Sharma/1421836
जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
राम मंदिर निर्माण के जुनून में डूबे कारसेवकों का जत्था 1992 में देशभर से अयोध्या पहुंचा। जबलपुर भी इसमें पीछे नहीं था। 400 से ज्यादा कारसेवक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ निकले। अयोध्या की ओर जबलपुर से गुजरने वाली हर ट्रेन में कारसेवक खचाखच भरे थे। जिन्हें स्वयं सेवक स्टेशन पर भोजन और रसद बांट रहे थे। केशव कुटी से भोजन वितरण के काम में लगे स्वयं सेवक पूरी दास्तां सुनाते हैं। कुछ ऐसे भी थे जिनके भीतर राम का जुनून ऐसा कि रेलवे की नौकरी से बेपरवाह होकर साथियों के साथ अयोध्या निकल गए। बिना किसी से कहे, कुछ बताए। चार दिन बाद लौटे तो बताया कि राम की जन्मस्थली गए थे।
ईंट
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निकाली, दंगा भड़का तो छोड़ आए-
त्रिमूर्ति नगर निवासी उपेंद्र नाथ शर्मा संघ विचारक हैं। 4 दिसंबर 1992 को चित्रकूट एक्सप्रेस से अयोध्या गए। रेलवे में राजभाषा अधिकारी के पद पर कार्यरत रहते हुए वे कारसेवक की तरह मंदिर आंदोलन का हिस्सा बने। उनके साथ रेलवे के दो अन्य सहयोगी भी थे। उन दिनों राष्ट्रीय स्वयं सेवक का पंजीयन केशव कुटी में हो रहा था। करीब 400 स्वयं सेवक कारसेवक के तौर पर यहां से गए। उनके अनुसार 5 दिसंबर को वे हजारों कारसेवकों के साथ अयोध्या पहुंचे। जहां संघ की तरफ से देशभर के अलग-अलग क्षेत्रों से आए कारसेवकों को ठहराया गया। उन्हें विक्रम प्रखंड के पंडाल में रुकवाया गया। 6 दिसंबर की सुबह कतारबद्ध तरीके से कारसेवकों को खड़ा किया गया। उस दौरान मंच पर विहिप के अशोक सिंघल, लाल कृष्ण आडवाणी, उमा भारती समेत दिग्गज कारसेवकों को संबोधित कर रहे थे। अपरान्ह 11 बजे के आसपास जन समुदाय भाषण सुनकर जोश और उत्साह से लबरेज हो गया। दिल और जुबान पर जय श्रीराम के नारे लगाते हुए विवादित ढांचे की तरफ हुजुम उमड़ पड़ा। उपेंद्र शर्मा ने बताया कि वो और उनके दो अन्य साथी भीड़ के साथ दीवार पर चढ़े। जहां पुलिस ने उन्हें रोका। झूमाझपटी हुई। दीवार की एक ईंट इस दौरान हाथ लगी। बाद में स्थिति बिगड़ी और दंगे भड़क गए। जिस वजह से ईंट को वहीं छोड़कर आना पड़ा। उनके अनुसार अयोध्या जाने की खबर उन्होंने अपने घर में भी नहीं दी थी। घरवाले तीन दिन तक परेशान थे। चौथे दिन जब लौटे तो घरवालों को पता चला। उनके अनुसार राम जन्मभूमि के लिए उनका प्रयास अब मंदिर निर्माण से सफल हो गया है।
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