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News Entry# 331406
  
Mar 14 (21:43) बनारस के रेलवे स्टेशन पर शुरू हुई 'घुमंतू पाठशाला (epaper.navbharattimes.com)
Commentary/Human Interest
NR/Northern

News Entry# 331406   
  Past Edits
Mar 14 2018 (21:43)
Station Tag: Varanasi Junction/BSB added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964
Stations:  Varanasi Junction/BSB  
दो घंटे की होती है क्लास
‘खाकी’ की पहल : पढ़ाने के साथ बांटते हैं कॉपी-किताब
बनारस के रेलवे स्टेशन पर शुरू हुई 'घुमंतू पाठशाला'
अच्छी खबर
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एसआई विनोद कुमार ने बताया कि बच्चों को रोज दो घंटे पढ़ाया जाता है। जब इन्हें अक्षर का ज्ञान हो जाएगा तब किसी अच्छे स्कूल में एडमिशन करवाया जाएगा। दोपहर में क्लास के बाद बच्चों को बिस्कुट और फल भी दिए जाते हैं। आने वाले समय में एनजीओ की मदद से कपड़े भी दिए जाने का प्रयास है।
एनजीओ का मिला साथ : जीआरपी की पहल को देखकर ‘साथी’ और ‘डेयर’ नाम के गैर सरकारी संगठन भी आगे आए हैं। ‘साथी’ की अनिमा ने बच्चों की काउंसलिंग का काम शुरू किया है। अनिमा के मुताबिक पहले तो ये बच्चे क्लास में बैठना ही नहीं चाहते थे। कई बच्चे नशा करते थे। काफी समझाने पर नशा बंद कर पढ़ाई पर ध्यान देने लगे हैं।
राजी करना मुश्किल : सीओ विमल श्रीवास्तव के मुताबिक बच्चों को रोज क्लास में भेजने के लिए पैरंट्स को राजी करना काफी मुश्किल होता है। बच्चे ट्रेनों में कचरा बीनकर परिवार चलाने में मदद करते हैं, इसकलए पैरंट्स नहीं चाहते की उनका बच्चा सबकुछ छोड़ पढ़ने जाए।
रोजगार से जोड़ेंगे : संस्था साथी और डेयर की ओर से स्वच्छता को लेकर परिवारीजनों को जागरूक किया जा रहा है। बच्चों के परिवार के लोगों को रोजगार से कैसे जोड़ा जाए, इसकी भी योजना बनाई जा रही है।
दोनों स्टेशन पर घूमने वाले बच्चों को चिह्नित करते हैं और फिर उन्हें समझा बुझाकर पढ़ाई के लिए तैयार करते हैं। बच्चों के घरवालों को इसके लिए राजी करना मुश्किल होता है, लेकिन ये अपनी सोच को मुकाम तक पहुंचाने में दिन-रात एक किए हुए हैं।
अब 40 बच्चे पढ़ने आते : पांच बच्चों से शुरू हुई ‘घुमंतू पाठशाला’ में एक महीने में ही बच्चों की संख्या 40 तक जा पहुंची है। ड्यूटी करने के साथ पुलिसवाले गरीब बेसहारा बच्चों को पढ़ाते ही नहीं, उनके लिए कॉपी-किताब, पेन-पेंसिल और बैग का इंतजाम अपनी तनख्वाह के पैसे से कर रहे हैं।•विकास पाठक, वाराणसी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में ‘खाकी’ ने मिसाल पेश की है। पुलिसवाले इन दिनों ट्रेनों में खाली बोतल बीनने या छोटी-मोटी चोरी करने या फिर नशे के आदी घुमंतू बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे हैं। इसके लिए बाकायदा रेलवे स्टेशन पर ही पाठशाला खोल दी है। रोज क्लास में 40 बच्चे आते हैं। इन्हें पढ़ाने वाले और कोई नहीं जीआरपी के सिपाही से लेकर दरोगा और सीओ तक हैं।
 वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नम्बर चार पर जीआरपी थाने के बगल में लंबे समय से खाली पड़ा कमरा इन दिनों घुमंतू बच्चों का क्लासरूम बना है। इसकी पहल जीआरपी के सीओ विमल श्रीवास्तव और एसआई विनोद कुमार ने की है
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