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The train is a small world moving through a larger world - Niraj Kumar

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News Entry# 434529
ईस्ट इंडियन रेलवे देश में बहुत तेजी से रेलवे के विकास में जुटी थी। हावड़ा से दिल्ली के बीच रेलवे लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा था। सन् 1857-58 के आसपास हावड़ा से दिल्ली तक रेलवे ट्रैक बिछाने का काम तकरीबन पूरा कर लिया गया था।
प्रयागराज, जेएनएन। प्रयागराज रेलवे स्टेशन (तत्कालीन इलाहाबाद जंक्शन) की स्थापना आज से 162 साल पहले 1859 में हुई थी। हावड़ा-दिल्ली के बीच एकल ट्रैक और छोटी सी केबिन से हुई शुरूआत आज ए ग्रेड स्टेशन तक पहुंच गई है। कोयले वाले इंजन की जगह पर अब बिजली वाले इंजन की ट्रेनें तेज गति से यहां से गुजरती हैं।
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से भवन में संचालित होता था इलाहाबाद रेलवे स्टेशन
19वीं सदी का मध्यकाल था जब ईस्ट इंडियन रेलवे देश में बहुत तेजी से रेलवे के विकास में जुटी थी। दिल्ली से कोलकाता तक टे्रन संचालन के लिए हावड़ा से दिल्ली के बीच रेलवे लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा था। सन् 1857-58 के आसपास हावड़ा से दिल्ली तक रेलवे ट्रैक बिछाने का काम तकरीबन पूरा कर लिया गया था। सन् 1859 में तत्कालीन इलाहाबाद में रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया और यहां से कानपुर के बीच पहली गाड़ी चलाई गई। उत्तर मध्य रेलवे के सेवानिवृत्त जनसंपर्क अधिकारी राकेश श्रीवास्तव बताते हैं कि वर्तमान में प्रयागराज रेलवे स्टेशन के सिटी साइड (चौक साइड) की ओर जहां पर कोआपरेटिव बैंक व पोस्ट आफिस खुला है, उसी के सामने छोटा सा भवन बनाया गया था जहां से एकल ट्रैक पर हावड़ा-दिल्ली के बीच ट्रेन का संचालन शुरू किया गया था।
1956 में बनकर तैयार हुआ था स्टेशन का मौजूदा भवन
वर्तमान प्रयागराज रेलवे स्टेशन का जो भवन है उसका निर्माण 1956 में किया गया था। राकेश श्रीवास्तव के मुताबिक देश की आजादी से पहले  ईस्ट इंडियन रेलवे इलाहाबाद परिक्षेत्र में रेलवे का विकास कर रही थी। देश आजाद होने के बाद उत्तर रेलवे का गठन हुआ और इलाहाबाद परिक्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में आ गया। उसी दौरान 1956 में तत्कालीन इलाहाबाद स्टेशन का नया भवन बनाया गया। वर्ष 2003 में उत्तर मध्य रेलवे के गठन के बाद स्टेशन के विकास के साथ यात्री सेवा व सुविधाओं को विस्तार मिला।
1965-66 में छिवकी-सूबेदारगंज के बीच हुआ था विद्युतीकरण
देश की आजादी के पूर्व ईस्ट इंडियन रेलवे के जमाने में इलाहाबाद-कानपुर के बीच 1859 में पहली टे्रन चलाई गई जबकि हावड़ा से दिल्ली के बीच सन् 1864 में पहली बार टे्रन संचालित हुई। देश आजाद होने के बहुत समय बाद तक कोयले वाले रेल इंजनों से ट्रेनों का संचालन होता था। धीरे-धीरे डीजल से चलने वाले इंजन प्रचलन में आए फिर इसके विकल्प के रूप में बिजली वाले इंजनों पर काम शुरू हुआ। उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी डाक्टर अमित मालवीय बताते हैं कि इलाहाबाद में पहली दफा छिवकी से सूबेदारगंज के मध्य 1965-66 में रेलवे टै्रक का विद्युतीकरण हुआ था। वर्तमान में यहां से गुजरने वाले करीब सभी रेलवे टै्रक विद्युतीकृत हो गए हैं।
अब देश के सौ बड़े स्टेशनों में शुमार है प्रयागराज जंक्शन
प्रयागराज जंक्शन वर्तमान में देश के सौ टॉप स्टेशनों में शुमार है। वर्तमान में यहां से ढाई सौ से अधिक पैसेंजर और गुड्स ट्रेन गुजरती हैं। 11 प्लेटफार्मों व 16 ट्रैक वाले इस स्टेशन पर वाईफाई से लेकर तमाम अत्याधुनिक यात्री सेवा मौजूद है। एक समय छुक-छुक करते हुए धीमी गति से गुजरने वाली गाडिय़ां अब यहां के ट्रैक पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती हैं। उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अजीत कुमार सिंह बताते हैं कि प्रयागराज जंक्शन से वर्तमान में  हावड़ा-दिल्ली, हावड़ा-गया-दिल्ली, हावड़ा-प्रयागराज-मुंबई, प्रयागराज से जबलपुर, मुगलसराय-कानपुर के साथ प्रयागराज से वाराणसी और फैजाबाद की ओर टे्रनों का संचालन होता है।
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